उल्हासनगर के सार्वजनिक शौचालय बदहाल

उल्हासनगर
केंद्र सरकार जहां देश में शहरों, गांवों में शौचालय बनवाने और स्वच्छता को लेकर प्रयासरत है। वहीं उल्हासनगर में सार्वजनिक शौचालयों की हालत दयनीय बनी हुई है, जिसके चलते कभी भी  शहर में कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है। शौचालयों के टूट जाने और दयनीय अवस्था में होने के कारण नागरिकों को उसका उपयोग करने में अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिसे  लेकर मनपा प्रशासन गंभीर नहीं है। तत्कालीन मनपा आयुक्त के कार्यकाल के दौरान शहर के सार्वजनिक शौचालयों की मरम्मत और देखभाल को लेकर 24 करोड़ रुपए का टेंडर निकाला गया था।
टेंडर मामले में तत्कालीन मनपा आयुक्त गणेश पाटिल और अच्युत हांगे ने गंभीरता नहीं दिखाई और टेंडर को अभी तक आर्डर नहीं दिया गया है। मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2017 में मनपा  के तत्कालीन आयुक्त ने शहर के सभी सार्वजनिक शौचालयों की मरम्मत और देखभाल के लिए 24 करोड़ रुपए का टेंडर निकाला था। टेंडर को शहर के ठेकेदार सुनील पिंपले ने भरा था।  तत्कालीन मनपा आयुक्त के तबादले के बाद वर्तमान मनपा आयुक्त सुधाकर देशमुख शौचालयों की दुर्व्यवस्था को लेकर गंभीरता नही दिख रहे है और न ही अभी तक आर्डर दे सके हैं। टेंडर में  शहर के सभी शौचालयों की मरम्मत के साथ प्रतिदिन शौचालयों की साफ- सफाई को भी शामिल किया गया था। वहीं शहर के शौचालयों की देखभाल नहीं की जा रही है। शौचालयों की हालत  इतनी दयनीय हो गई है कि कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है। मनपा के सार्वजनिक शौचालयों को शहर के राजनीतिक, भूमाफिया और ठेकेदारों ने तोड़कर उस पर दुकानें और मकान  बनाकर बेच दिए है, जिसे बचा पाने और तोड़ने से रोक पाने में मनपा नाकाम रही है। वहीं बचे हुए शौचालय की भी देखभाल और मरम्मत नहीं किए जाने से शौचालयों को नागरिकों को मजबूरी  में उपयोग करना पड़ रहा है।

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