कश्मीर मुद्दे पर मेरी कोइ नही सुनता : इमरान

बॉन (जर्मनी)
कश्मीर मुद्दे पर वैश्विक मंचों पर भारत से मुंह की खाने के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने शुक्रवार को स्वीकारा कि इस मुद्दे पर उन्हें वैश्विक समुदाय का साथ नहीं  मिल रहा। उन्होंने कहा कि इस पर अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया बेहद धीमी रही है। उल्लेखनीय है कि आर्टिकल 370 से जुड़े फैसले के बाद पाकिस्तान भारत के आंतरिक मामले में गैरजरूरी  हस्तक्षेप की कोशिश कर रहा है और उसने इस मुद्दे को वैश्विक मंचों पर भी उठाया, जहां से उसे कोई सफलता हासिल नहीं हुई। इमरान ने कहा कि दुर्भाग्यवश, पश्चिमी देशों के  लिए व्यावसायिक हित ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। भारत बड़ा बाजार है और कश्मीर में 80 लाख लोगों के साथ या हो रहा है, उस पर धीमी प्रतिक्रिया की यही वजह है। बता दें कि भारत ने दो-टूक श दों में कहा है कि आतंकवाद और वार्ता साथ-साथ नहीं हो सकती। जब तक पाकिस्तान अपने देश में प्रायोजित आतंकवाद पर लगाम नहीं लगाता,  उससे कोई बातचीत नहीं हो सकती।

भारत से वार्ता के प्रयास का दावा

दुनियाभर को पता है कि भारत पाक द्वारा फैलाए आतंकवाद के कारण उससे वार्ता यों नहीं कर रहा है, लेकिन झूठे दावे करते हुए इमरान ने कहा कि पीएम बनने के बाद, मैंने   भारत सरकार और पीएम मोदी से बातचीत के प्रयास किए। बतौर पीएम मेरे पहले भाषण में मैंने कहा कि अगर भारत एक कदम आगे बढ़ता है तो हम दो कदम आगे बढ़ेंगे और  मतभेद को दूर करेंगे। लेकिन मुझे बहुत जल्दी पता चल गया कि आरएसएस की विचारधारा के कारण भारत ने मुझे जवाब नहीं दिया। इमरान ने ये बातें ऐसे समय में कही हैं जब   चीन और पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कश्मीर का मुद्दा उठाने के लिए अनौपचारिक बैठक की है। वहीं, भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवता रवीश कुमार ने गुरुवार को  स्पष्ट कर दिया था कि यूएनएससी में बहुमत का विश्वास है कि कश्मीर मुद्दे पर चर्चा के लिए यह सही मंच नहीं है। रवीश कुमार ने कहा कि पाकिस्तान की तरफ से यूएनएससी के  एक सदस्य के साथ मिलकर इस मंच का गलत इस्तेमाल करने की कोशिश की गई है। यूएनएससी में बहुमत का मानना है कि यह इस तरह के मुद्दे पर चर्चा के लिए उचित मंच  नहीं है और इसपर भारत और पाकिस्तान में द्विपक्षीय वार्ता होनी चाहिए।

हमारा इरादा नेक : चीन
पाकिस्तान को खुश करने के चकर में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कश्मीर का मुद्दा उठाकर एक बार फिर किरकिरी कराने वाले चीन ने अब नेक इरादे और शांति की दुहाई दी है।  चीन ने कहा कि उसके प्रयास का मकसद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव कम करना है और इसके पीछे उसका 'नेक इरादा' है। चीन ने यह दावा भी किया है कि परिषद में  ज्यादातर सदस्यों ने घाटी की स्थिति पर अपनी चिंता जताई है। एक दिन पहले ही भारत ने कहा था कि पाकिस्तान की तरफ से सुरक्षा परिषद में कश्मीर का मुद्दा उठाने का चीन  का प्रयास विफल हो गया है। सुरक्षा परिषद ने भारी बहुमत के साथ राय व्यत की कि भारत और पाकिस्तान के द्विपक्षीय मुद्दे पर चर्चा के लिए यह सही मंच नहीं है। पाकिस्तान के  सदाबहार साथी चीन ने बुधवार को एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के परामर्श कक्ष में बंद बैठक के दौरान 'अन्य मामलों' के तहत कश्मीर का मुद्दा उठाया। इस बारे में पूछने  पर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवता गेंग शुआंग ने कहा कि चीन की स्थिति स्पष्ट है। यह मुद्दा इतिहास से जुड़ा एक विवाद है और इसे संयुक्त राष्ट्र के चार्टर, यूएनएससी के प्रस्तावों और द्विपक्षीय संधियों के आधार पर, और शांतिपूर्ण तरीके से हल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के अनुरोध पर सुरक्षा परिषद ने 15 जनवरी को कश्मीर की  स्थिति की समीक्षा की। सुरक्षा परिषद के सदस्य मौजूदा हालात को लेकर चिंतित हैं और उन्होंने संबंधित पक्षों से आह्वान किया है कि वे चार्टर को देखें और संयम बरतने के साथ   राजनीतिक संवाद के जरिएविवादों का शांतिपूर्वक समाधान करें।

कश्मीर पर भारत के रुख को लेकर कोई शंका नहीं : रूस
भारत में रूस के दूत निकोले कुदाशेव ने शुक्रवार को कहा कि रूस को कश्मीर पर भारत के रुख को लेकर कोई शंका नहीं है और यह पूरी तरह से भारत तथा पाकिस्तान के बीच का   द्विपक्षीय मामला है। साथ ही रूस के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन रोमन बबुश्किन ने कहा कि भारत को सभी एस-400 वायु रक्षा मिसाइल प्रणालियों की आपूर्ति 2025 तक कर दी  जाएगी। उन्होंने बताया कि भारत को दी जाने वाली एस-400 मिसाइलों का निर्माण शुरू हो गया है। कुदाशेव ने बताया कि विदेश मंत्री एस। जयशंकर रूस-भारत-चीन त्रिपक्षीय बैठक  में भाग लेने के लिए 22 और 23 मार्च को रूस जाएंगे। उन्होंने जम्मू कश्मीर जाने के लिए आमंत्रित न किए जाने पर कहा कि जिन्हें कश्मीर पर भारत के रुख को लेकर शंकाएं हैं,  वे वहां जा सकते हैं, हमें कोई शक नहीं है। सुरक्षा परिषद में कश्मीर मुद्दा उठाने की चीन की कोशिशों पर कुदाशेव ने कहा कि शिमला समझौते और लाहौर घोषणापत्र के आधार पर  यह भारत और पाकिस्तान के बीच का पूरी तरह से रिूपक्षीय मामला है। एस-300 का उन्नत संस्करण एस-400 मिसाइलें पहले रूस के रक्षा बलों को ही उपल ध थीं। इसका निर्माण   अल्माज-एंते करता है और यह 2007 से रूस के बेड़े में शामिल है।

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