बेदम है विपक्ष के तरकश के तीर

पूरा विपक्ष परिवारवाद, क्षेत्रवाद, जातिवाद, अल्पसंख्यकवाद ऐसे किसी न किसी वाद से ग्रस्त हैं। कोई इन सभी वादों को अपने में समेटे राजनीति करता है तो कोई इनमें से एक-दो  का पुरस्कर्ता है। 2014 से लेकर आज तक जिस तरह की राजनीति मोदी और शाह के नेतृत्व में भाजपा कर रही है, उसने सभी वादों को भुनाकर लंबे समय तक सत्ता की मलाई  काटने वाले दलों की दुकान बंद कर दी है। कारण उक्त सभी तिलिस्म मोदी के सामने न 2014 में काम आए और न ही 2019 में। कारण राष्ट्रवाद और विकास हावी रहा है और इन  दो बिंदुओं पर भाजपा और उसकी नीत केंद्र सरकार ने कई मिथक तोड़े। कई ऐसे निर्णय किए जो उक्त वादों के चलते वर्षों से नहीं हुए। तो अब जबकि इनके सारे हथकंडे खत्म हो  गए हैं, तो अब इन्होंने राज्य के चुनावों में भाजपा को मिलकर घेरने की रणनीति पर काम करना शुरू किया है और बिना मुद्दे के मुद्दे गढ़े जा रहे हैं। जैसे कि सीएए को लेकर दिख  रहा है। गुमराह लोग अफवाहों को सच मान रहे हैं और उपद्रव पर उतारू हैं। परंतु सीएए पर कोई खास असर पड़ेगा ऐसा नहीं लगता। कारण भाजपा भी इस बात को समझ रही है  और लोंगों को सच बताने और समझाने के लिए देशव्यापी अभियान छेड़ चुकी है। जिसका असर भी हो रहा है। और रही बात विपक्ष की, तो चाहे सपा हो, बसपा हो, टीएमसी हो और  सबसे बड़ा विपक्षी दल कांग्रेस हो, राजद हो, जदयू हो, नायडू या डीएमके सबके मतबैंक एक हैं, जबकि भाजपा का मतबैंक इन सबसे अलग है, तो यह साथ खड़े होकर तब तक ही  चिल्लाते हैं, जब तक इनके मतबैंक में सेंध लगती नहीं दिखती। परंतु जैसा ही उसका अंदेशा शुरू होता है इनके अलग-अलग स्वर विद्रूप रूप में सामने आने लगते हैं। सुर्खियां बनती  रहती है और अब जबकि उत्तर प्रदेश में प्रियंका पांव पसार रही हैं, तो मायावती को कष्ट हो रहा है। वही हाल टीएमसी का है। वही हाल केजरीवाल का है। अब सब कांग्रेस के सीएए  के खिलाफ विपक्ष को गोलŽबंद करने के प्रयास में सेंध लगा रहे हैं। उससे दूरी बना रहे हैं। कारण इन सबको एक-दूसरे का डर है और उसके साथ भाजपा का डर है। कारण उसने  इनके आधार को ही हिला दिया है। उक्त सभी वादों को खत्म कर सिर्फ राष्ट्रवाद और विकासवाद का झंडा बुलंद किया है। इस सबका असर यह है कि ये उसके बारे में चिल्लाने को  मजबूर हैं, परंतु वह चिल्लाना यदि कांग्रेस को बढ़त दे तो फिर उस पर और भी अपना हमला तेज करने से ये गुरेज नहीं करते। तो ये भाजपा और कांग्रेस दोनों के मध्य पिस रहे  हैं। कारण इनके परिवारवादी, जातिवादी, भ्रष्ट राजनीति का कोई भविष्य दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहा है। आज भारत और भारतीयता की बात हो रही है, तो यह गड़े मुर्दे उखाड़ने  में लगे हैं। कोई जाति आधार में जनगणना की बात कर रहा है, तो कोई एनसीआर और एनपीआर का हौवा खड़ा कर रहा है। परंतु अब देश और देशवासियों की सोच काफी आगे  निकल चुकी है। अब यदि ये चाहेंगे कि आज भी आप पुराने हथकंडों से या उक्त वादों को कुरेदकर सत्ता सुंदरी का वरण कर सत्ता की मलाई काट सकते हैं, तो आप भयानक  मुगालते में हैं। कारण आज देश की जनता ने उक्त दलों से इतर सरकारों को और उससे हासिल होने वाले लाभ का, विकास का स्वाद चख लिया है, तो अब विपक्ष किसी भी वादे पर  जनता को उल्लू नहीं बना सकता। जनता का काम करना होगा, विकास दिखाना होगा तभी बात बनेगी। वरना ऐसे ही आपस में लड़ते और भाजपा को कोसते रह जाएंगे, हाथ कुछ  नहीं आने वाला।

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