शिवाजी महाराज के गुरु नहीं थे रामदास स्वामी : पवार

शिवाजी की उपाधि छत्रपति थी, न कि जाणता राजा

Sharad Pawar
मुंबई
राकांपा प्रमुख शरद पवार ने बुधवार को सातारा में कहा कि उन्होंने कभी भी जाणता राजा कहलाने की मांग नहीं की थी, लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि 17वीं सदी के योद्धा राजा  शिवाजी के लिए सही उपाधि छत्रपति थी। उन्होंने कहा कि जाणता राजा की उपाधि को कवि संत समर्थ रामदास द्वारा गढ़ा गया था। उन्होंने कहा कि रामदास शिवाजी के गुरु नहीं  थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना शिवाजी से करने वाली एक पुस्तक को लेकर हुए विवाद के बीच भाजपा नेता और राकांपा के पूर्व सांसद उदयनराजे भोसले ने मंगलवार को पवार  पर निशाना साधते हुए कहा था कि केवल शिवाजी को जाणता राजा कहा जाना चाहिए। पवार के समर्थक कभी-कभी राकांपा प्रमुख की प्रशंसा में उनके लिए इस उपाधि का इस्तेमाल  करते हैं। सातारा जिले के खताव में एक कार्यक्रम में पवार ने भोसले का नाम लिए बगैर कहा कि किसी ने कहा कि जाणता राजा शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है। मैंने किसी
को भी मुझे जाणता राजा कहने के लिए कभी नहीं कहा। भोसले ने पिछले वर्ष राकांपा से इस्तीफा दे दिया था। पवार ने कहा कि लेकिन यदि आप शिवाजी महाराज के इतिहास का  अध्ययन करते हैं, तो उनकी उपाधि छत्रपति थी, न कि जाणता राजा। संत समर्थ रामदास ने जाणता राजा शब्द गढ़ा था। उन्होंने कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि रामदास शिवाजी महाराज के गुरु थे, लेकिन यह सच नहीं है। रामदास शिवाजी महाराज के गुरु नहीं थे, लेकिन राजमाता जीजामाता (शिवाजी की मां) थीं। भाजपा नेता जयभगवान गोयल द्वारा  लिखित एक पुस्तक आज के शिवाजी नरेंद्र मोदी को लेकर इस सप्ताह की शुरुआत में एक विवाद खड़ा हो गया था, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी को आधुनिक समय का शिवाजी बताया  गया था। महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस ने इस पर नाराजगी जताई थी और कहा था कि किसी की तुलना महान राजा से नहीं की जा सकती है।
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