अस्पताल और पैथोलॉजी सेंटरों की बिहार सरकार को नहीं है जानकारी

पटना
बिहार की राजधानी पटना में कई निजी अस्पताल और पैथोलॉजी खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। आलम यह है कि यहां हजारों की संख्या में फल-फूल रहे अस्पताल बिना  रजिस्ट्रेशन के ही चल रहे हैं। हैरानी की बात ये है कि गली, मोहल्लों से लेकर चौक-चौराहों तक कुकुरमुत्ते की तरह खोले जा रहे अस्पतालों का सरकार के पास डेटा तक नहीं है। ऐसे  में अवैध रूप से चल रहे संस्थानों पर कार्रवाई तो दूर सरकार जांच करने में भी सक्षम नहीं है। बता दें कि अस्पताल और पैथोलॉजी खोलने के लिए पहले संस्थान का निबंधन रजिस्ट्रेशन) जरूरी होता है, लेकिन पटना जिले में मौजूद लगभग  5,000 से ज्यादा निजी अस्पतालों में महज 501 अस्पतालों ने ही निबंधन कराया है। वहीं विशेषज्ञों के एक अनुमान के अनुसार शहर में पैथोलॉजी की संख्या भी चार हजार से ज्यादा हैं, पर निबंधन महज 155 ने ही करवाए हैं। हालांकि पटना जिले की एसीएमओ डॉक्टर विभा कुमारी सिंह  की मानें तो बिना निबंधन के चल रहे अस्पतालों की निगरानी के लिए कमिटी गठित की गई है और समय-समय पर कार्रवाई भी की जाती है। पर चौंकाने वाली बात ये है कि गैर निबंधित अस्पतालों के आंकड़े सरकार के पास नहीं हैं। एसीएमओ भी मानती हैं कि बिना डिग्री वाले यानी झोला छाप डॉक्टर भी अस्पताल खोल लेते हैं और मरीजों की जान से  खिलवाड़ करते हैं। जानकारी के अनुसार सबसे अधिक अस्पताल और जांच घर पटना के बायपास इलाके में है, जहां मीठापुर से लेकर जीरो माइल तक हर पांच कदम की दूरी पर  एक अस्पताल नजर आता है, और सामने हर बीमारी के इलाज का बोर्ड लटका रहता है।
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