CAA पर बिखरा विपक्ष

नई दिल्ली
नागरिकता संशोधन कानून के बाद देश में पैदा हुए हालात और यूनिवर्सिटीज कैंपस में हो रही हिंसा पर चर्चा के लिए सोनिया गांधी ने दिल्ली में एक अहम बैठक बुलाई। इस बैठक  में शामिल होने के लिए तमाम विपक्षी दलों को न्योता दिया गया, लेकिन कई दलों ने कांग्रेस की इस कोशिश को झटका दे दिया। अब खबर ये है कि महाराष्ट्र में कांग्रेस की सहयोगी  शिवसेना भी सोनिया गांधी की अगुवाई वाली इस बैठक में शामिल नहीं हुई। हालांकि, शिवसेना ने निमंत्रण न मिलने का हवाला दिया है। शिवसेना सूत्रों का कहना है कि उन्हें इस  बैठक का न्योता नहीं मिला है, जिस कारण उनकी पार्टी इसमें शामिल नहीं हुई। इस बैठक में कांग्रेस के अलावा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, डीएमके, आरजेडी, लेफ्ट, एयूडीएफ और अन्य  दल हिस्सा लिए। दिलचस्प बात ये है कि महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में शिवसेना की सरकार चल रही है, जिसे कांग्रेस और एनसीपी दोनों का समर्थन हासिल है। बावजूद  इसके 9 दिसंबर 2019 को जब लोकसभा में नागरिकता बिल पर वोटिंग का मौका आया, तो शिवसेना ने कांग्रेस के खिलाफ जाकर मोदी सरकार का समर्थन किया। हालांकि, इसके  बाद जब 11 दिसंबर को राज्यसभा में यह बिल लाया गया, तो शिवसेना ने वॉकआउट कर दिया यानी यहां उसने बिल का समर्थन तो नहीं किया, लेकिन विरोध में मतदान भी नहीं  किया। कांग्रेस का साथ जहां सहयोगी शिवसेना ने ही छोड़ दिया है, वहीं राजनीतिक विरोधी तृणमूल कांग्रेस, बसपा और आम आदमी पार्टी ने भी उसे झटका दिया है। टीएमसी प्रमुख  और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विपक्षी दलों की इस बैठक से खुद को अलग कर लिया है, तो राजस्थान में बीएसपी विधायकों को कांग्रेस में शामिल करने की  साजिश का आरोप लगाते हुए मायावती का दल भी बैठक में हिस्सा नहीं लिया। दिल्ली में होने जा रहे विधानसभा चुनाव से ठीक पहले प्रमुख दल आप ने भी अपनी प्रतिद्वंदी कांग्रेस  की इस बैठक से दूरी बना ली है।

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