पहले दिन 48 मामले पहुंचे पुलिस लाइन

लखनऊ
 एफआइआर दर्ज कराने के बाद भी जिन्हें न्याय नहीं मिलता था, उनके लिए अब अच्छे दिन आ गए हैं। उत्तर प्रदेश में बीते डेढ़ माह से कमिश्नरी सिस्टम लागू हो चुका है। इस नए सिस्टम के  तहत पुलिस विभाग एक सराहनीय पहल 'जनसुनवाई आमने-सामने' लेकर आया है। अब प्रत्येक शनिवार पीड़ित के सामने विवेचक की भी पेशी होगी। इस कार्यक्रम की शुरुआत शनिवार को  पुलिस लाइन में ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर नवीन अरोड़ा और कमिश्नर सुजीत पांडेय की मौजूदगी में हुई। पहले दिन पुलिस लाइन में 48 मामले पहुंचे। कमिश्नर ने खुद सभी के विवेचनाधिकारी  और पीड़ित फरियादियों को आमने-सामने बैठाकर मामले की प्रगति रिपोर्ट मांगी। इस दौरान दो चौकी इंजार्ज को लाइन हाजिर किया गया। जनसुनवाई आमने-सामने अभियान के शुभारंभ में एक  तरफ जहां विवेचकों की पोल खुली। वहीं, हसनगंज क्षेत्र मदेयगंज चौकी इंचार्ज प्रमोद कुमार व मड़ियांव क्षेत्र केशवनगर चौकी इंचार्ज डीके सिंह लाइन हाजिर किए गए। पहले दिन ही 48 मामले  पुलिस लाइन पहुंचे। डीसीपी नॉर्थ सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी ने लोगों की समस्याओं को गंभीरतापूर्वक सुना। वहीं, फरीयादी बाजारखाला निवासी राजकुमार ने बताया कि मारपीट और धमकी के मुकदमे आरोप पत्र दाखिल हैं, लेकिन आरोपितों की गिरफ्तारी न होने से आए दिन जान से मारने की धमकी मिल रही है। लामार्टिनियर के छात्र राहुल श्रीधरन के माता-पिता विवेचक के साथ पहुंचे।  उन्होंने बताया कि गौतमपल्ली थाने की पुलिस की लापरवाही के कार्यक्रम उद्घाटन होते ही पुलिस लाइन में भारी संख्या में पीड़ित फरियाद लिए जमा हुए। डीसीपी नॉर्थ सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी ने लोगों  की समस्याओं को गंभीरतापूर्वक सुना। वहीं फरीयादी बाजारखाला निवासी राजकुमार ने बताया कि मारपीट और धमकी के मुकदमे आरोप पत्र दाखिल हैं, लेकिन आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से  आए दिन जान से मारने की धमकी मिल रही है। लामार्टिनियर के छात्र राहुल श्रीधरन के माता-पिता विवेचक के साथ पहुंचे। उन्होंने बताया कि गौतमपल्ली थाने की पुलिस की लापरवाही के चलते  पांच साल बाद भी न्याय नहीं मिला है। यह पहल जनसुनवाई के तर्ज पर शुरू हो रही है। प्रत्येक शनिवार पीड़ित के सामने विवेचक की भी पेशी होगी। इस व्यवस्था में पुलिस लाइन प्रत्येक  निवार कुल 50 गंभीर मामले लिए जाएंगे। यह पहला मौका होगा जब अफसर पीड़ित की समस्याएं तो सुनेंगे ही हीलाहवाली पर उसके सामने ही विवेचक पर कार्रवाई भी प्रस्तावित कर सकेंगे।  सात डीसीपी, दोनों ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर के साथ पुलिस कमिश्नर स्वयं इसमें भाग लेंगे। इस जनसुनवाई में खास बिंदु यह होगा कि प्रत्येक अधिकारी पांच गंभीर मामलों के पीड़ितों के साथ  विवेचक से सीधे संवाद करेंगे। विवेचक को मुकदमे से संबंधित सभी कागजात के साथ पेश होना होगा।

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