शांति और सद्भाव हो पहली प्राथमिकता

दिल्ली में स्थिति नियंत्रण में है और धीरे-धीरे जन जीवन सामान्य हो रहा है। प्रधानमंत्री, गृहमंत्री लोगों से शांति की अपील कर चुके हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, पुलिस आयुक्त,  मुख्यमंत्री और उप राज्यपाल भी उपद्रवग्रस्त इलाकों का दौरा कर चुके हैं, जिसका असर भी दिख रहा है। सबका लक्ष्य है शांति हो और लोग सुचारू रूप से अपना दैनिक जीवन शुरू  कर सकें। उपद्रव और हिंसा से किसी का कोई भला नहीं हो सकता। मानवता और जनजीवन की रक्षा सबसे जरूरी है। इसकी बानगी दिल्ली के इस उपद्रव में भी खूब दिखी और जिस  तरह दोनों समुदायों के लोंग एक-दूसरे की रक्षा के लिए आगे आए अपने घर-द्वार खुले कर दिए, जिस तरह सुरक्षाबलों ने अपना खून देकर घायलों की जान बचाई, उससे यह  विश्वास और पुब्ता होता है कि हमारे लोगों में अभी भी व्यक्ति को किसी धर्मावलंबी के रूप में नहीं, बल्कि एक इंसान के रूप में पहचाना जाता है और वास्तव में लोग एक-दूसरे की  भलाई के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। यही भारतीयता है, जिसमें हर धर्म और संप्रदाय के लोगों ने मिलकर एक ऐसी सामूहिक गुलदस्ता बनाया है, जिसमें अलग- अलग लगे फूल, उसमें अनेक तो दिखते हैं, पंरतु उसमें अंतर निहित एकता को भी रेखांकित करते हैं और शायद यही कारण है कि इस एकता को बिखेरने के जितने प्रयास होते हैं,   वह उतनी ही मजबूत होती है। कारण सबका साथ और सबका विकास और सबका विश्वास तथा संकट के समय सारे पारस्परिक भेदभाव भूलकर एक-दूसरे का साथ हमारे रक्त में है।   जहां ऐसी सोच और संस्कार हों वहां कोई भी बाल बाका नहीं कर सकता। हां थोड़े समय के लिए कुछ लोगों को कुछ लोग गुमराह जरूर कर सकते हैं। फिलहाल हमारी सारी शक्ति  उन इलाकों में शांति स्थापित करने में लगी है। यह पहली प्राथमिकता है, परंतु इसके बाद ऐसे तत्वों की खोजबीन भी उतनी ही जरूरी है, जो माहौल खराब करने का अवसर खोजते  रहते हैं और मौका पाते ही ऐसे कुछ कर गुजरते है, जिससे लोगों की जान जाती है, उनकी संपत्ति का नुकसना होता है, लोग घायल होते हैं और देश और समाज की छवि खराब  होती है और वह भी उस समय जब देश में महत्वपूर्ण विदेशी मेहमान और उसके साथ एक बड़ा हजूम मौजूद रहता है गलत कभी भी गलत है, परंतु ऐसे मौके पर दंगा और आगजनी  और भी बड़ा पाप है, तो ऐसे पापियों को खोज-खोज कर निकाला जाना चाहिए और उनके जुर्म के अनुरूप वे दंडित हों और उनके काले कारनामे समाज के सामने उजागर हों इसका  भी पूरा ध्यान सरकार और जिम्मेदार संस्थाओं को रखना होगा। किसी को भी अनायास का बवाल खड़ा कर माहौल को इस तरह खराब करने की हिमाकत नहीं करनी चाहिए कि  दर्जनों निर्दोष जान गवां बैठें, सैकड़ों घायल हों और बड़ी मात्रा में घर, दुकान और समानों का नुकसान हो। चाहे जिस किसी ने भी ऐसी हिमाकत की हो उसे उसका दंड मिलना ही  चाहिए साथ ही दोनों वर्ग के उन बड़बोले नेताओं पर भी लगाम जरूरी है, जो अपने कड़वे बोलों से अपनी राजनीतिक दुकान को चलाने के लिए अपना मतबैंक बनाने के लिए समाज में  जहर फैलाने का काम करते हैं। यदि उनकी तुच्छ राजनीति लोगों को भड़का रही है। सांप्रदायिक द्वेष का कारक बन रही है, तो उन पर शिकंजा कसा जाना जरूरी है। कारण जैसी  स्थिति दिल्ली में बनी, वह निहायत चिंताजनक है, इसके लिए जो भी जवाबदार हैं उन्हें अपने पातक का जवाबदेह बनाया ही जाना चाहिए। एसआईटी का गठन हो चुका है और इसमें  कोई दो राय नहीं कि जल्द से जल्द ऐसे लोगों के चेहरे से नकाब हटेगा और वे कटघरे में खड़े होंगे।

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