सीएम-तेजस्वी की मुलाकात से निकली बात गई दूर तक

पटना
 बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मंगलवार को तीन साल बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के बीच कमरे में 20 मिनट की मुलाकात हुई। उसके बाद फिर  दोनों नेताओं की मुलाकात हुई और दोनों ने एक साथ चाय की चुस्की भी ली। इतना ही नहीं तेजस्वी से मुलाकात के तुरंत बाद एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ प्रस्ताव विधानसभा से तुरंत  पास करा लिया गया। इन मुलाकातों पर भाजपा की भी नजर रही और वो असहज रही, तो वहीं विपक्षी पार्टियों को मौका मिल गया। हम के अध्यक्ष जीतनराम मांझी सहित कई नेता नीतीश  कुमार को महागठबंधन में आने का खुला ऑफर भी देने लगे, तो वहीं राबड़ी देवी ने इन सबको सिरे से ये कहते हुए नकार दिया कि नीतीश चाहेंगे भी तो हमारा मन डोलने वाला नहीं है। वहीं  एनडीए की अपनी सहयोगी भाजपा को असहज देख जदयू ने अपनी सफाई दी और जदयू प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद  यादव की मुलाकात से भाजपा को असहज होने की जरूरत नहीं। 
मुलाकात का अर्थ केवल राजनैतिक ही नहीं समझना चाहिए। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि प्रतिपक्ष और सरकार लोकतंत्र के दो पहिए हैं। इनका मिलना-जुलना अस्वाभाविक नहीं माना जाता। जदयू प्रदेश कार्यालय में संवाददाताओं से बातचीत के क्रम में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने यह बात कही। जदयू प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि  बिहार में एनडीए पूरी तरह से मजबूत है। हम मजबूती के साथ चुनाव लड़ेंगे। विपक्ष के पास कार्यक्रम कुछ है नहीं इसलिए यात्रा कर रहे। तेजस्वी तो राज्य सरकार के खिलाफ अपनी यात्रा में  नियमित रूप से विष वमन कर रहे हैं। विधानसभा में एनआरसी और एनपीआर पर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किए जाने के विषय पर उन्होंने कहा कि पूर्व में भी कई बार ऐसा हुआ है। ऐसे  मामले में तो बिहार उदाहरण प्रस्तुत करता रहा है।

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