सांसदों-विधायकों से संवाद में नियमों की अनदेखी की तो अफसरों पर होगी कार्रवाई

नई दिल्ली
सरकारी अधिकारियों को अब सांसदों और विधायकों के साथ संवाद में बहुत एहतियात बरतनी होगी। एक सरकारी आदेश के मुताबिक, केंद्र और राज्य सरकारों के सभी अधिकारियों  को सांसदों और विधायकों के साथ संवाद के मामले में नियमों का पालन करने को कहा गया है। संवाद में नियमों की अनदेखी होने पर अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा  सकती है। आदेश में सभी राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों से कहा गया है कि सामान्य तौर पर सांसदों की आवाजाही के दौरान अधिकारियों से जिमेदारियां निभाते समय  संवेदनशीलता बरतने को कहा जाए।

प्रोटोकॉल उल्लंघन के मामले सामने आने के बाद दिया आदेशसरकार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि अधिकारी विशेष रूप से संसद सत्र के दौरान अपनी जिमेदारियां निभाते समय सावधानी बरतें। सरकार ने मौजूदा दिशा- निर्देशों में  तय प्रोटोकॉल के उल्लंघन के कुछ मामले सामने आने के बाद यह आदेश जारी किया है। कार्मिक मंत्रालय ने आदेश में कहा है कि जनता के मान्यता प्राप्त प्रतिनिधि के नाते हमारी  लोकतांत्रिक व्यवस्था में संसद सदस्यों और विधायकों का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान होता है। सरकार ने मौजूदा दिशा-निर्देशों में तय प्रोटोकॉल के उल्लंघन के कुछ मामले सामने आने  के बाद यह आदेश जारी किया है।

कार्मिक मंत्रालय समय-समय पर दोहराता है दिशानिर्देश
कार्मिक मंत्रालय ने कहा है कि अपने कर्तव्यों के सिलसिले में सांसदों-विधायकों को अकसर भारत सरकार या राज्य सरकारों के मंत्रालयों अथवा विभागों से जानकारी लेना या सुझाव देना अथवा अधिकारियों के साथ इंटरव्यू के लिए कहना जरूरी लगता है। कार्मिक मंत्रालय, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय ने प्रशासन और संसद सदस्यों तथा विधायिका सदस्यों  के बीच आधिकारिक कामकाज से संबंधित दिशा- निर्देश जारी किए हैं। इन्हें समय-समय पर दोहराया जाता है। मौजूदा गाइडलाइंस के अनुसार, सांसदों के साथ बातचीत पर तुरंत प्रतिक्रिया होनी चाहिए।

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