आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवार को दिया जाने वाला मुआवजा बढ़ाया जाए : पाटिल

मुंबई
आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों को मिलने वाला मुआवजा बढ़ाया जाए, साथ ही बेमौसम बारिश से प्रभावित किसानों को प्रति हेक्टेयर आठ हजार रुपए की सीमा बढ़ाई  जाए और सांगली-कोल्हापुर में महाबाढ़ की वजह से तबाह हुए घरों का सरकार की तरफ से पुनर्निर्माण शुरु किया जाए। विधानसभा में पूरक मांगों पर चर्चा में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष  और विधायक चंद्र्रकांत पाटिल ने यह मांग की। पाटिल ने कहा कि पिछले सरकार के कार्यकाल में किसानों की आत्महत्या कम करने के लिए अनेक उपाय योजना की गई थी। इसमें  प्रमुख रूप से नानाजी देशमुख के नाम पर एक योजना शुरु कर किसानों का उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया गया। इसके अलावा यवतमाल, उस्मानाबाद जैसे जिलों के गांवों में   समितियां बनाकर किसानों की मदद के लिए आर्थिक प्रावधान किए गए थे। यह योजना आज भी शुरु है, लेकिन इसके लिए आर्थिक निधि का प्रावधान बढ़ाना जाना चाहिए। दूसरी  तरफ आत्महत्या करने वाले किसान के परिवार को फिलहाल एक लाख रुपए का मुआवजा दिया जाता है, इस रकम से किसान परिवार का भरण-पोषण संभव नहीं है। ऐसे में   मुआवजा बढ़ाया जाना चाहिए। साथ ही दुर्घटना में किसान की मृत्यु होने पर उनके परिवार को चार लाख रुपए का मुआवजा दिया जाता है, इसमें भी बढ़ोतरी की जाए और इसमें  बीमा को शामिल किया जाए। पाटिल ने कहा कि इस बार बेमौसम बारिश से किसानों को भारी नुकसान हुआ है।
सरकार की तरफ से प्रति हेक्टेयर आठ हजार रुपए दिए जाते हैं, लेकिन जो मांग की गई थी, उस अनुसार 25 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर का मुआवजा दिया जाए। उन्होंने कहा कि  सांगली और कोल्हापुर जिले को महाबाढ़ का सामना करना पड़ा। अनेक घर गिर गए। सरकार ने घर बनाने के लिए कोई कदम नहीं उठाएं हैं। कुछ निजी स्वयंसेवी संस्था और   गणमान्य लोगों ने अस्थाई रूप से घर बनाने की पहल की है। हालांकि इसके लिए निधि उपलब्ध है, लेकिन कई कारण से सरकार की तरफ से घरों का पुनर्निर्माण नहीं किया जा रहा  है। ऐसे में इस पर तेजी से कार्रवाई की जाए।
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