दिल्ली हिंसा: पटरी पर लौट रही जिंदगी

Delhi Life
नई दिल्ली
दिल्ली दंगे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 42 हो गई है। धुएं का गुबार छंटने के बाद शहर में तीन दशक के सबसे भयावह दंगों से हुआ वास्तविक नुकसान अब सामने आ रहा है।   वहीं आशंकाओं के बीच लोग काम के लिए घरों से बाहर निकलते दिखे और हिंसा प्रभावित इलाकों में कुछ दुकानें एवं अन्य प्रतिष्ठान भी खुले। इस बीच दिल्ली के उपराज्यपाल  अनिल बैजल ने प्रभावित इलाकों का दौरा किया है और वहां का हालात जाना है।

सड़कों पर पत्थर साफ कर रहे निगमकर्मी
निगमकर्मी जहां चार दिन की सांप्रदायिक हिंसा के बाद उत्तर-पूर्व दिल्ली की सड़कों एवं गलियों से पत्थर, कांच के टुकड़े और मलबे साफ करते दिखे, वहीं कुछ दुकानदार अपनी जली   हुई और टूटी-फूटी दुकानों का मायूसी से मुआयना करते नजर आए। पुलिस और अर्द्धसैनिक बल के कर्मी मस्जिदों में जुमे की नमाज के मद्देनजर सत चौकसी बरतते नजर आए।  कुछ स्थानों पर दुकानें एवं प्रतिष्ठान खुले और सड़कों पर कुछ और निजी वाहन भी नजर आए। कुछ इलाकों में ऑटो और ई- रिक्शा भी चलने शुरू हुए जब लोग काम के लिए या  जरूरी कार्यों के लिए घर से बाहर निकलने शुरू हुए।

पुलिस बोली, अफवाहों पर न दें ध्यान
पुलिस के अधिकारियों ने कहा है कि वे अफवाहों को रोकने के लिए अतिरिक्त प्रयास कर रहे हैं और लोगों के बीच भरोसा पैदा करने के लिए प्रभावित इलाकों के आस-पड़ोस में  नियमित रूप से ब्लैग मार्च और बातचीत कर रहे हैं। रविवार से दिल्ली पुलिस आयुक्त का पदभार संभालने जा रहे एसएन श्रीवास्तव ने कहा कि मेरा काम यह सुनिश्चित करना है   कि लोग सुरक्षित महसूस करें और यह भी कि पुलिस उनके साथ है। उन्होंने बताया कि पिछले दो दिनों में प्रभावित इलाकों में 331 शांति बैठकों को आयोजन हुआ है। इस हफ्ते  दिल्ली में हिंसा शुरू होने के बाद उन्हें दिल्ली पुलिस का विशेष आयुक्त (कानून-व्यवस्था) नियुक्त किया गया था।

कई इलाकों में धारा 144 लागू
दंगा प्रभावित इलाकों की स्थानीय मस्जिदों ने शांति एवं सौहार्द बनाए रखने की अपील की और लोगों को अफवाहों पर यकीन न करें और पुलिस के साथ सहयोग करें।

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