मनपा में भाजपा करेगी अपनी स्थिति मजबूत

मुंबई
भारतीय जनता पार्टी मनपा में अब सत्ताधारी शिवसेना से दो हाथ करने के लिए मजबूत हो रही है। वरिष्ठ नेता और पूर्व नगरसेवक को मनोनीत सदस्य बनाकर शिवसेना को कड़ी  टकर देने की तैयारी भाजपा ने कर ली है। मनोनीत सदस्य गणेश खनकर की सदस्यता से राजीनामा लेकर भाजपा ने उनकी जगह शिरसाट को मनपा में भेजने का कदम उठाया है।  बता दें कि मनपा में भाजपा ने अपनी बात पुरजोर तरीके से रखने और सत्तापक्ष को कड़ी टकर देने के लिए पूरी ताकत लगाना शुरू कर दिया है। इसके लिए वह अपनी तरफ से  जोरदार तैयारी में जुटी हुई है। भाजपा अब तक मनपा में पारदर्शी काम-काज को लेकर कदम उठा रही थी, लेकिन अब पूरी तरह विपक्ष की भूमिका अपनाने का निर्णय लिया है।  इसके लिए भाजपा ने मनपा में विरोधी पक्ष नेता की भी मांग की है। इस संदर्भ में महापौर किशोरी पेडणेकर और मनपा आयुक्त प्रवीण परदेशी को भाजपा ने पत्र भी दिया और  प्रभाकर शिंदे को विरोधी पक्ष नेता घोषित भी कर दिया है। प्रभाकर शिंदे पूर्व शिवसेना नेता और नगरसेवक रह चुके है। इतना ही नहीं शिवसेना की तरफ से मनपा सदन के नेता पद  की भी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। भाजपा अब उन्हीं को विरोधी पक्ष नेता बनाकर शिवसेना को घेरने की तैयारी की है। वहीं मनपा सदन में मजबूती के साथ भाजपा की तरफ से पक्ष  रखने के साथ शिवसेना को घेरने के लिए पूर्व नगरसेवक और वरिष्ठ नेता भालचंद्र शिरसाट को मनोनीत सदस्य बनाने की तैयारी कर लिया है। एक तरह से शिवसेना को मनपा   सदन सहित स्थाई समिति में घेरने के लिए भाजपा ने कमर कस लिया है। भाजपा के इस रुख से अब यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में मनपा में शिवसेना की पूरी तरह  पोल खोलने की तैयारी भाजपा ने कर ली है। मनपा में कड़ी टकर देने के लिए भाजपा ने जहां वरिष्ठ नेता भालचंद्र शिरसाट को मनपा में उतारने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में  रीटा मकवाना और उज्वला मोडक को उपनेता बनाकर हिंदी, गुजराती समाज को स्थान देने का प्रयास भाजपा ने किया है।

क्यों बनी नौबत
लोकसभा चुनाव के दौरान मनोज कोटक सांसद चुने गए। ऐसी स्थिति में कोटक मनपा में अपनी उपस्थित न नहीं दर्ज करा पा रहे हैं, जिस कारण भाजपा को भालचंद्र शिरसाट को  मनोनित सदस्य बनाने के लिए यह कदम उठाना पड़ा है। भालचंद्र्र शिरसाट वरिष्ठ नेता तो है ही उनकी मनपा के काम-काज पर अच्छी पकड़ है। वे स्थाई समिति सदस्य से लेकर  सुधार समिति अध्यक्ष के पद पर काम कर चुके है। इसके लिए पार्टी ने उन पूरा विश्वास दिखाया है। साथ ही उनके जरिए शिवसेना को घेरने का प्रयास भाजपा ने किया है।

स्थाई समिती सदस्य बनाने की संभावना
शिरसाट को आगे चलकर स्थाई समिति का सदस्य भी बनाया जा सकता है। सूत्रों की माने तो स्थाई समिति के चुनाव तक उन्हें सदस्य नहीं बनाया जाएगा, क्योंकि मनोनीत सदस्य को मतदान करने का अधिकार नहीं होता है। स्थाई समिति का चुनाव अप्रैल महीने के पहले सप्ताह में होने के बाद भाजपा किसी एक सदस्य से राजीनामा लेकर शिरसाट को स्थाई   समिति का सदस्य बना सकती है। बता दें कि स्थाई समिति मनपा की तिजोरी समझी जाती है। यहां से ही सभी कामों के प्रस्तावों को मंजूर कर ठेका दिया जाता है। इस कमेटी के    पास मनपा की तिजोरी पर पूरा अधिकार होता है। भाजपा शिवसेना के फिजूल खर्ची और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और उसकी पोल खोलने के लिए शिरसाट को स्थाई समिति  अध्यक्ष के चुनाव के बाद सदस्य बना सकती है। यहां यह बताना उचित होगा कि केपी नाईक इसके पहले मनोनीत सदस्य रहते हुए स्थाई समिति के सदस्य की जिम्मेदारी संभाल  चुके हैं।

शिरसाट का अब तक का कार्यकाल
भाजपा ने मनपा में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए भालचंद्र शिरसाट को मनोनीत सदस्य नियुक्त कर उनके ऊपर बड़ा विश्वास दिखाया है। शिरसाट दो बार मनपा में नगरसेवक  रह चुके है और सुधार समिति के अध्यक्ष तक की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। ऐसा माना जाचा है कि उन्हें मनपा के काम-काज का अच्छा ज्ञान है। सांसद बने मनोज कोटक और  पराग शाह का इस्तीफा लेकर भाजपा दोबारा चुनाव कराने का पर्याय चुनती तो, उसमें देरी होती। इसके साथ ही मात्र दो साल के लिए चुनाव लड़ने पर खर्च का बोझ भी पड़ता। महा  आघाड़ी उपचुनाव में उम्मीदवार उतार भाजपा को हराने की कोशिश करती। इसे ध्यान में रखते हुए भाजपा ने सरल और तत्काल रास्ता अपनाते हुए भालचंद्र शिरसाट को मनोनीत सदस्य बनाने का रास्ता अपनाया है।

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