भोजन बनाते समय ध्यान दें

पैसा कमाने के लिए आज का मनुष्य एक मशीन बन गया है। जी तोड़ मेहनत करने के बाद मनुष्य को स्वादिष्ट, संतुलित और पौष्टिक भोजन की जरूरत पड़ती है। जीवन चलाने के  लिए आहार मनुष्य की पहली जरूरत है और इस जरूरत को पूरा करने के लिए मनुष्य क्या कुछ नहीं करता। औरतें भी आज इस जरूरत की पूर्ति के लिए पुरूषों से पीछे नहीं हैं  पर इन सबके पीछे आहार का स्वरूप ही बिगड़ गया है। आज हम भोजन को उतना मह व नहीं देते। बस, कुछ खाना है, ताकि पेट भर जाए।
आज जो भोजन घरों में बनाया जाता है, वह केवल स्वाद को ध्यान में रखकर बनाया जाता है। तेज मिर्च मसाले युक्त भोजन बनाए जाते हैं, ताकि खाना स्वादिष्ट बन सके। आज   यह बात गौण होती जा रही है कि हम भोजन इस तरह बनाएं कि खाना पेट में पहुंच कर शीघ्र ही पच जाये और पोषक तत्व भी नष्ट न हों।
बस इस बात पर जोर दिया जाता है कि खाना जितनी जल्दी हो, बनकर पूरा हो जाय, देखने में रंग-रूप भी अच्छा हो तथा चटपटा और लज्जतदार हो। भोजन का मूल उद्देश्य भूख  को मिटाना नहीं, बल्कि शरीर को स्वस्थ रखना है ताकि कार्य करने की शक्ति बनी रहे। भोजन बनाने से पहले गृहिणी ध्यान दें.... 

  • गृहिणी को भोजन हमेशा प्रसन्नचित्त होकर बनाना चाहिए क्योंकि 'जैसा खावे अन्न, वैसा होवे मन'। प्रसन्न मन से बनाए और परोसे गए भोजन का अपना अलग ही आनंद होता है।
  • भोजन में अंकुरित अनाज, दालों व सलाद का समावेश करें।
  • हरी साग-सब्जियों, मौसमी फलों, दूध, दही व छाछ को अपने भोजन में समिलित करें।
  • भोजन को अधिक देर तक न पकाएं। इससे उसकी पौष्टिकता नष्ट होती है।
  • खाद्य पदार्थों में जरूरत से ज्यादा पानी न डालें। ज्यादा पानी डालने से उस पानी को फेंकना पड़ता है, जिसमें भोजन के पोषक तत्व मौजूद रहते हैं। अगर पानी ज्यादा हो गया हो तो   उस पानी को दाल में डाल दें या फिर आटा गूंथ लें।
  • नमक का प्रयोग कम करें, क्योंकि नमक से पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं।
  • खाद्य पदार्थ को तेल, घी में ज्यादा न भूनें क्योंकि भूनने से विटामिन नष्ट हो जाते हैं।
  • सड़ा, गला या घुन लगा खाद्य पदार्थ कभी न पकाएं।
  • रसोई की स्वच्छता परपूर्ण ध्यान दें। गंदगी पर मक्खी, मच्छर, चींटियां जल्दी आ जाती हैं अत: खाने-पीने की वस्तुओं को ढक कर रखें।
  • खाना बनाते समय हर जरूरत की चीज को अपने पास रख लें, ताकि व्यर्थ की थकान से बच सकें। इससे गैस के साथ-साथ समय की भी बचत होगी।
  • कुछ महिलाओं के खाने के बरतन तो साफ-सुथरे रहते हैं पर खाना पकाने के बरतन यूं ही गंदे, जले और चिकनाई से भरे होते हैं। उनकी धारणा रहती है कि रसोईघर में तो कोई   आकर देखता नहीं। रसोई को हमेशा साफ सुथरी रखें। साफ-सुथरी रसोई और बर्तनों में ही भोजन बनाने का मजा ही अलग होता है। रसोई की सफाई न केवल सुंदरता के लिए उपयोगी है अपितु स्वास्थ्य के लिए भी आवश्यक है। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है अर्थात् स्वच्छ रसोई में ही  स्वच्छ भोजन बनाने के विचारों को प्रश्रय मिलता है।
  • घर में खाना तो प्राय: हर गृहिणी बनाती है। जिस प्रकार भोजन पकाने का सबका तरीका अलग होता है, उसी तरह रसोई घर की साफ-सफाई व सामान रखने के नजरिए में भी  विभिन्नता होती है पर अंतत: सभी गृहणियां भोजन बनाने की सभी आवश्यक वस्तुएं जैसे दाल के डिम्बे, खाना बनाने के बरतन, मसाले के डिम्बे, रोजमर्रा में काम आने वाले बरतन रसोईघर में ही रखती हैं। इन सभी सामानों की सफाई पर विशेष ध्यान दें। दर्पण की तरह चमकते बरतन व रसोईघर देखकर किसका मन आपके बनाए लज्जतदार खाने की ओर  आकृष्ट नहीं होगा।
  • खड़े होकर खाना बनाते समय एप्रन बांध लें, ताकि कपड़ों पर दाग धम्बे न पड़ें।
  • साफ सुथरे वस्त्रों में, चमकते बरतनों में, प्रसन्नचित खाना परोसती गृहिणी को देखकर किसकी भूख जागृत नहीं होगी। खाना हमेशा प्रेमपूर्वक आग्रह कर खिलायें। खाने की मेज हमेशा  स्वच्छ साफ सुथरी रखें। पानी हमेशा स्वच्छ हो। इन सब बातों का ध्यान रखते हुए यदि कोई गृहिणी खाना पकाती है तो निस्संदेह अपने परिवार की सबसे बड़ी हितैषी है, जिसके घर  आने को रोग और डॉक्टर तरसते रहते हैं।

-„ मीना जैन छाबड़ा

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