वेतन वृद्धि के प्रस्ताव को हड़ताली शिक्षकों ने बताया 'लालीपॉप'

पटना
 नियोजित शिक्षकों को तोहफा देने की खबर सामने आने के बाद शिक्षक संघ ने सरकार पर फिर से हमला बोला है और इस तोहफे को सरकारी लॉलीपॉप बताया है। बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष  समन्वय समिति ने साफ कहा कि सरकार के वेतन वृद्धि के फैसले शिक्षकों को स्वीकार नहीं है। समिति का कहना है कि जब तक कि सहायक शिक्षक का दर्जा, पूर्ण वेतनमान और राज्य कर्मी  का सरकार दर्जा नहीं देती है, तब तक नियोजित शिक्षक हड़ताल खत्म नहीं करेंगे। शिक्षकों ने सरकार पर शिक्षा के अधिकार का हनन करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कई राज्यों में समान  काम के बदले समान वेतन सरकार दे रही है फिर बिहार सरकार वेतन का रोना क्यों रो रही है। 
वहीं सेवा शर्त लागू होने, ईपीएफ का लाभ देने पर भी शिक्षक हड़ताल तोड़ने को तैयार नहीं हैं।  यहां तक कि यह भी चेतावनी दी है कि अगर सरकार वार्ता के लिए भी बुलाती है, तो शिक्षक तभी वार्ता करेंगे जब वेतनमान पर सरकार सहमति देगी। समन्वय समिति के नेता मार्कंडेय पाठक,  आनंद कौशल, अश्विनी पांडेय शिक्षकों का कहना है कि राज्य में बर्खास्त, निलंबित हुए शिक्षक साथ ही मुकदमा झेल रहे शिक्षकों पर से सरकार कार्रवाई वापस लेती है तभी शिक्षक संघ वार्ता के  लिए तैयार होगा। पूरे मामले पर शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन वर्मा ने फिर से सरकार की मजबूरी बयां करते हुए कहा कि बिहार एक गरीब राज्य है, ऐसे में सरकार को वेतनमान देने की शक्ति नहीं है। शिक्षा मंत्री ने साफ कहा कि नीतीश सरकार खुद शिक्षकों पर ध्यान दे रही है, क्योंकि हमने 1500 से यहां तक पहुंचाया इसीलिए फिर से हम वेतनवृद्धि करने जा रहे हैं।
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