टांसिल का लाभदायक उपचार

Throat
आयुर्वेद के अनुसार अधिकतर मुंह के रोग कफजन्य कारणों से होते हैं। इससे जो लोग कफजन्य आहार - विहार करते हैं, उनको मुंह के रोग विशेषत: होते हैं। मुंह के रोगों में टांसिल  सर्वाधिक पीड़ा-दायक है। यह प्राय: बच्चों को अधिक हो जाता है परंतु बड़ों को भी यह रोग हो जाता है। इस रोग में बचपन में बच्चे बार-बार बीमार पड़ते हैं। उनके गले में दर्द नहीं  मिटता तथा खाना खाने में भी तकलीफ होती है। नींद में खांसी आती है। इस समय आधुनिक चिकित्सक प्राय: टांसिल का ऑपरेशन करने की सलाह देते हैं। आपरेशन कराने पर भी  टांसिल के पूरे मिट जाने की संभावना नहीं रहती।
आयुर्वेद में टांसिल का इलाज संभव है। बिना आपरेशन के ही सामान्य औषधियों द्वारा ही टांसिल खत्म हो सकते है। परहेज करने से टांसिल नहीं होते। चॉकलेट, पिपर-मेंट, फ्रिज का   ठंडा पानी, आइसक्रीम या शीतल पेय बिलकुल नहीं देने चाहिएं। बरसात में भीगना नहीं चाहिए या शीतल जल में स्नान नहीं करना चाहिए। सर्दियों में गले में मफलर लगा कर रखना  चाहिए। इतना परहेज करने से टांसिल नहीं होते एवं होते भी हैं तो ज्यादा दर्द या परेशान नहीं करते।
टांसिल के उपचार में मुख्य दवाई हल्दी है। आयुर्वेद में हल्दी के गुणों की बहुत जानकारी है। आयुर्वेद के अनुसार हल्दी (कच्ची गोली) का रस कड़वाहट, एवं मिर्चदार होता है। यह  स्वभाव में उष्ण, रूक्ष, रोगों का खत्म करने वाला तथा कफ के, त्वचा के रोगों, कोढ़ आदि को मिटाती है।
हल्दी की रासायनिक खोज करने के बाद जाना गया है कि हल्दी में एक क्षारीय द्रव्य होता है तथा उसमें एन्टीसेप्टिक गुण होने से वह शरीर को रोगों से बचाती है। मिसरी को इसमें   मिलाया जाता है जो औषधि के गुण रखती है। यह पौष्टिक व शीतल होती है। तुरंत शक्ति देने वाले पदार्थों के समान मिसरी-ग्लूकोज जैसा ही कार्य करती है। टांसिल में गले के दोनों   तरफ कान के नीचे सूजन आती है। खेल में गिर जाने से या पैर मुड़ जाने से सूजन को 'शोथ' कहते है। हल्दी शोथहरण का गुण रखती हैं। हल्दी एवं मिसरी के लेप को सूजन पर 
मलने से सूजन मिट जाती है।
इसके अलावा न्नि उपचार भी करने चाहिए - हल्दी कफ खत्म करने वाली तथा टांसिल कफजन्य हैं अत: हल्दी का चूर्ण टांसिल पर लगाकर एवं इस पर गुनगुना पानी पीने से बहुत  लाभ होता है। भोजन में कच्ची हल्दी बहुत लाभदायक है। पानी में कड़वे नीम के पत्ते 4० या 5०, दो चम्मच नमक तथा एक चम्मच शुद्ध घी को गरम कर लेने के बाद नमक एवं   नीम के पानी के कुल्ले करने चाहिए। हल्दी की गांठ को आग में सेंक कर उसका चूरा कर दूध में डाल कर पीना चाहिए।
एक कप पानी में आधा चम्मच हल्दी का चूर्ण, इसमें इतनी ही मिसरी का चूर्ण डाल कर मिलाकर सुबह, दोपहर एवं शाम को पीना चाहिए। कुछ भी खाने के बाद कच्ची हल्दी का  थोड़ा सा टुकड़ा छाल उतारकर मुंह में रखकर चूसना चाहिए। हींगवटी अथवा त्रिफलावटी का चूर्ण योग्य मात्रा में लेकर पेट साफ रखने से भी टांसिल मिटते हैं। इस प्रकार नियमित रूप  से चार से छ: महीने दही, छाछ, मावे की मिठाई, केला, अमरूद, मिर्चवाली चीजों, अचार, पापड़ आदि से परहेज करने से तथा नियमित रूप से आयुर्वेदिक उपचार करने से टांसिल को   पूर्णरूप से मिटा सकते हैं। टांसिल खत्म हो जाने के बाद बच्चों का वजन भी बढ़ता है।

-  दीपक खंडेलवाल

Post a comment

[blogger]

MKRdezign

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget