सैलरी वालों को झटका, पीएफ के पैसे पर घटा ब्याज

नई दिल्ली
आपके प्रॉविडेंट फंड (पीएफ) पर ब्याज दरों को लेकर फैसला हो गया है। वित्त वर्ष 2019-20 के लिए ब्याज दरें 8.65 फीसदी से घटाकर 8.50 फीसदी कर दी गई हैं। कर्मचारी  भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के शीर्ष निकाय केंद्रीय न्यासी बोर्ड (सीबीटी) की बैठक में ये फैसला हुआ है। केंद्रीय न्यासी बोर्ड ही पीएफ पर ब्याज दर को लेकर फैसला लेता है  और इस फैसले को वित्त मंत्रालय की सहमति की जरूरत होती है। कर्मचारी भविष्य निधि के दायरे में आने वाले कर्मचारियों के मूल वेतन (मूल वेतन+महंगाई भत्ता) का 12  प्रतिशत पीएफ में जाता है। इतना योगदान कंपनी भी करती है, लेकिन कंपनी के 12 फीसदी योगदान में से 8.33 फीसदी पीएफ में जाता है। इसके अलावा केंद्र सरकार भी इसमें मूल  वेतन का 1.16 प्रतिशत का योगदान देती है। ईपीएफओ अपने एनुअल ऐक्रुअल्स का 85 प्रतिशत हिस्सा डेट मार्केट में और 15 प्रतिशत हिस्सा एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स के जरिए  इक्विटीज में लगाता है। पिछले साल मार्च के अंत में इक्विटीज में ईपीएफओ का कुल निवेश 74,324 करोड़ रुपए था और उसे 14.74 फीसदी का रिटर्न मिला था। हालांकि सरकार  को यह भी ध्यान में रखना होगा कि पीएफ पर ब्याज दर घटने से कर्मचारियों का सेंटीमेंट खराब होगा। क्योंकि अब उन्हें कम मुनाफा मिलेगा। ईपीएफओ पर ब्याज दर एक बड़ी  सेंटीमेंट बूस्टर रही है। इसमें अभी कोई भी कमी एंप्लॉयी सेंटीमेंट को और खराब कर सकती है।
लेबर मिनिस्टर की अध्यक्षता वाला बोर्ड ईपीएफओ में निर्णय करने वाला शीर्ष निकाय है। ईपीएफओ के 6 करोड़ एक्टिव सŽसक्राइबर हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईपीएफओ ने  18 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश किया है। इसमें से करीब 4500 करोड़ रुपए दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉर्पोरेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज में  लगाए गए हैं। इन दोनों को ही भुगतान करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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