बिना मॉस्क ही कोरोना के संदिग्ध मरीज का इलाज कर रहे हैं डॉक्टर

छपरा
 जिले के मांझी प्रखंड में कोरोना वायरस का एक संदिग्ध मरीज मिला है, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है। मांझी प्रखंड के घोरहट गांव निवासी सतीश कुमार  मिश्रासिंगापुर से हाल ही में अपने घर लौटे थे, जिसकी खबर स्वास्थय विभाग के पास पहुंची और एहतियातन उनको जांच के लिए मांझी पीएचसी बुलाया गया, लेकिन यहां जो नजारा दिखा उसे  देखकर सरकार के तमाम दावों की कलई खुलती नजर आई। दरअसल कोरोना के संदिग्ध मरीज की जिस डॉक्टर ने जांच की उसने खुद ही मास्क नहीं पहना था। जाहिर है इस असावधानी की  जह से इस मरीज को वास्तविक कोरोना वायरस का संक्रमण होता तो डॉक्टर भी प्रभावित हो सकता था।
 इस बारे में पूछने पर मांझी के डॉक्टर जितेंद्र ने बताया कि स्वास्थ विभाग द्वारा उन्हें  कोई सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई है, लेकिन डीएम का आदेश हुआ कि घोरघट गांव में सतीश कुमार मिश्रा नामक एक व्यक्ति सिंगापुर से लौटे हैं, जिनको कोरोना का संक्रमण हो सकता है,  जिसके बाद उन्होंने मरीज को अस्पताल बुलाकर जांच की। बिना किसी सुरक्षा उपाय के इलाज करने के बारे में पूछने पर डॉक्टर जितेंद्र ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें अब तक इसकी  कोई सुविधा उपलब्ध नहीं कराई है। वहीं सिविल सर्जन माधवेश्वर झा ने बताया कि डीएम के आदेश पर सतीश कुमार मिश्रा को जांच के लिए अस्पताल बुलाया गया था, लेकिन उनको तत्काल  कोई दिक्कत नहीं महसूस हुई लिहाजा उन्हें 14 दिन के लिए होम आइसोलेशन में रखा गया है। कोरोना का संक्रमण सामने आने के बाद उनकी विस्तृत जांच की जाएगी। सतीश चंद्र मिश्रा ने भी कहा कि वे स्वास्थ्य विभाग को पूरा सहयोग करेंगे। हालांकि इस तस्वीर ने स्वास्थ्य महकमे की हकीकत बयान कर दी है, जो महकमा कोरोना से लड़ने के लिए तैयारी का दावा कर रहा है उसके  पास एक मामूली मास्क भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में इस गंभीर बीमारी से लड़ कैसे लड़ाई होगी इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। 
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