गिरते कच्चे तेल के भाव का भारत उठाएगा फायदा

50 अरब का लाखों टन करेगा स्टोर

नई दिल्ली
कच्चे तेल का भाव मार्च के महीने में करीब 40 फीसदी तक लुढ़क गया है। भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा तेल का आयातक है  और यह जरूरत का 80 फीसदी तेल आयात करता है। भारत सस्ते तेल के इस मौके को गंवाना नहीं चाहता है और इसलिए उसने कच्चे तेल को ज्यादा से ज्यादा स्टोर करने का  फैसला किया है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि पेट्रोलियम मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय से कच्चे तेल की खरीदारी के लिए 50 अरब रुपए की डिमांड की है। वह इस राशि से 8-9 क्रूड  कैरियर खरीदने के बारे में सोच रहा है। भारत की कोशिश है कि वह इस मौके का फायदा उठाकर कम से कम 36 मिलियन बैरल तेल का स्टोर करे। इसके अलावा कोरोना के कारण  सप्लाई में होने वाली समस्याओं को ध्यान में रखते हुए भी पांच मिलियन बैरल स्टोर करने की तैयारी चल रही है। पिछले दिनों खबर आई थी कि सरकार ने ओडिशा और कर्नाटक में जमीन के भीतर पथरीली गुफाओं में कच्चा तेल जमा करने का फैसला किया है। नरेंद्र मोदी सरकार की कोशिश है कि आपात स्थिति में कच्चे तेल का भंडार खत्म न हो पाए।  यहां 65 लाख टन कच्चा तेल जमा रहेगा।कच्चे तेल की कीमत पर गौर करें, तो एक मार्च को इसकी कीमत 45 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा थी। अभी यह 30 डॉलर प्रति बैरल के  करीब है। ओपेक और रूस के बीच होड़ जारी है। कोई भी देश उत्पादन में कटौती को तैयार नहीं है। सऊदी अरामको ने साफ-साफ कहा है कि वह अप्रैल में उत्पादन में और तेजी  लाएगा और कीमत 25 डॉलर प्रति बैरल तक आ जाएगी।
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