जीरो बैलेंस पर खुला राम मंदिर का अकाउंट

अयोध्या
 रामजन्मभूमि पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मंदिर के लिए ट्रस्ट का ऐलान किया जा चुका है। ऐसे में ट्रस्ट के बोर्ड ऑफ ट्रस्टियों की आगामी 4 अप्रैल को एक प्रस्तावित बैठक होने जा रही  है। जिसके बाद माना जा रहा है कि मंदिर के लिए अतिरिक्त पत्थर की तराशी और अभी तक तराशे जा चुके पत्थरों की सफाई का काम तेजी से शुरू हो जाएगा। साथ ही यह भी बताया जा रहा  है कि जल्द ही मंदिर निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। ऐसे में ट्रस्ट ने निर्णय लिया है कि आगामी एक अप्रैल से शुरू होने वाले नए वित्तीय वर्ष में राम मंदिर के लिए दानदाताओं की तरफ  से दिए जाने वाले दान को भी प्राप्त करना शुरू कर दिया जाएगा।
 बताया जा रहा है कि ट्रस्ट ने भारतीय स्टेट बैंक की एक शाखा में जीरो बैलंस पर एक अतिरिक्त खाता भी खुलवा लिया है।  रामजन्मभूमि के ट्रस्टी और आरएसएस के प्रान्त कार्यवाह डॉ अनिल मिश्र ने बताया कि ट्रस्ट का इनकम टैक्स में रजिस्ट्रेशन कराया जा चुका है। वहीं खबर है कि राम नवमी त्यौहार के दौरान  अगले महीने रामजन्मभूमि परिसर में पहली बार श्रद्धालुओं को आरती में शामिल होने कीअनुमति मिलेगी। रामलला की मूर्तियों को वर्तमान में अस्थाई मंदिर से 200 मीटरकी दूरी पर स्थापित  करने की व्यवस्था की जा रही है। भगवान राम के जन्मदिन के तौर पर मनाया जाने वाला रामनवमी त्यौहार सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद आ रहा है।
 फैसले में विवादित जमीन को  एक न्यास को सौंपने का आदेश दिया गया था ताकि वहां राम मंदिर का निर्माण हो सके। बताया जा रहा है कि कोरोना वायरस फैलने के बीच दो अप्रैल को रामनवमी उत्सव को रद्द करने की  मांग की जा रही थी, लेकिन स्थानीय प्रशासन इसे जारी रखने को इच्छुक है। न्यास ने श्रद्धालुओं को जुलूस देखने की अनुमति दी है और त्यौहार के बजट को 51 हजार रुपए से बढ़ाकर डेढ़ लाख  रुपए कर दिया है। बता दें पिछले साल 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने दशकों पुराने इस विवाद पर फैसला सुनाया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में अयोध्या की विवादित जमीन  को रामलला को देने का आदेश दिया है। साथ ही तीन महीने के अंदर राम मंदिर निर्माण के लिए एक ट्रस्ट के गठन का भी निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन के बदले मुस्लिम  पक्ष को अयोध्या में ही मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन देने का फैसला सुनाया था। इस फैसले के खिलाफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड व अन्य मुस्लिम पक्षकारों, जिनमे जमीयत  उलेमा-ए-हिन्द भी शामिल था, उसने पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी। हालांकि मामले में सबसे बड़े पक्षकार सुन्नी सेंट्रल व फ बोर्ड और एक अन्य पक्षकार इकबाल अंसारी ने फैसले के खिलाफ  पुनर्विचार याचिका दाखिल करने से इनकार कर दिया था। 
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