कालाबाजारी पर सख्ती जरूरी

इस समय कोरोना वायरस के संक्रमण और उससे उपजा खतरा दुनिया भर में चिंता का विषय बना हुआ है, ऐसे समय में इसके इलाज से संबंधित दवाओं की कालाबाजारी की खबरें यही दर्शाती हैं  कि कैसे कुछ लोग या समूह देश और समाज के सामने पैदा संकट को भी मुनाफे का मौका बना लेते हैं। ऐसे में सरकार से यही उम्मीद होती है कि वह दवाओं की जमाखोरी और कालाबाजारी के  खिलाफ सख्त कार्रवाई करे और इस पर रोक के लिए एक ठोस नियमन की व्यवस्था करे। यूं अभी कोरोना के संक्रमण की आशंका के बीच संबंधित महकमे खुद ही सक्रिय हैं, लेकिन केंद्र सरकार  ने भी राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण, भारतीय औषधि महानियंत्रक और राज्य सरकारों को दवाओं में उपयोग होने वाले महत्वपूर्ण रसायनों और दवा की कलाबाजारी, अवैध जमाखोरी पर  लगाम लगाने को लेकर स्पष्ट निर्देश जारी किया है। 
औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण ने राज्य के मुख्य सचिवों और प्रधान सचिवों (स्वास्थ्य) तथा राज्य औषधि नियंत्रकों को पत्र लिख कर  अपने-अपने क्षेत्रों और केंद्र शासित प्रदेशों में एपीआई यानी दवा बनाने के काम में आने वाले महत्वपूर्ण रसायनों और दवाओं के उत्पादन तथा उपलब्धता पर नजर रखने को कहा है। एक मुश्किल  दौर में निश्चित रूप से इस तरह की सक्रियता की जरूरत है। हालांकि एक सामान्य व्यवस्था यह होनी चाहिए कि दवा के मामले में अवैध तरीके से जमाखोरी, कालाबाजारी या मिलावट जैसी बातों  के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाए और ऐसे कामों में लिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। यह किसी से छिपा नहीं है कि दवाओं की कीमत निर्धारण से लेकर बिक्री तक  के मामले में किस तरह बिना किसी हिचक के मुनाफे के कारोबार को अंजाम दिया जाता है। यह विडंबना ही है कि औषधि कीमत नियामक को दवाओं की कीमत सीमा और मूल्यों में स्वीकार्य  वृद्धि के संदर्भ में दवा आदेश, 2013 का उल्लंघन नहीं होना सुनिश्चित करने के लिए अलग से निर्देश जारी करना पड़ता है, जबकि यह राज्यों के नियमित दायित्व में शामिल होना चाहिए। 
अगर  दवा की कीमतों और उसके कारोबार से संबंधित कानूनी प्रावधान पहले से मौजूद हैं, तो उसके पालन के लिए सरकार को अलग से निर्देश जारी करने की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए थी। यह एक  सामान्य व्यवस्था होनी चाहिए थी, जिस पर अमल अनिवार्य हो। एक खबर के मुताबिक चीन में कोरोना वायरस के बेलगाम फैलाव की आशंका के बीच दवाओं के दाम और उनकी कालाबाजारी के आसार बनने लगे हैं। दरअसल इसके पीछे मुख्य वजह यह हैकि दवाओं के निर्माण के लिए जो कच्चा माल या महत्वपूर्ण रसायन चीन से आते हैं, उनका आना फिलहाल रुका हुआ है। इसका  असर सामान्य उपयोग की दवाओं पर भी पड़ा है। एकस्थिति यह भी है कि चीन पर अपेक्षा से ज्यादा निर्भरता की वजह अमेरिका और यूरोप के मुकाबले चीन से आने वाले रसायनों की कम  कीमत भी है। जाहिर है ऐसे में सबसे ज्यादा जरूरत इस बात की होती है कि दवा बनाने के लिए महत्वपूर्ण रसायनों का पर्याप्त और सुरक्षित अवधि तक का भंडारण सुनिश्चित किया जाए,  क्योंकि आपात स्थिति कभी भी पैदा हो सकती है, बल्कि दवा बनाने के लिए कच्चा माल यानी महत्वपूर्ण रसायनों के निर्माण का वैकल्पिक उपाय करना भी सरकार की प्राथमिकता में शुमार होना  चाहिए, लेकिन इन सबके बीच यह सरकार की जिम्मेदारी है कि बाजार में जरूरी और जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित हो और अभाव या कमी का बहाना बनाकर मुनाफे के कारोबारी दवाओं की जमाखोरी या कालाबाजारी न कर पाएं। 

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