एक बार फिर से महंगा हो सकता है आलू

Potato
नई दिल्ली
एक दिन पहले तक आलू किसान के दोनों हाथों में लड्डू थे। आलू के बाजार रेट और लागत में बड़े अंतर के चलते ज्यादा मुनाफे की उम्मीद दिखाई दे रही थी। बीते कई साल को  देखते हुए पैदावार भी अच्छी हुई थी, लेकिन 5 मार्च को हुई बारिश और ओलों ने किसान के ख्वाबों पर पानी फेर दिया। खेतों में पानी भर गया है, जिसके चलते आलू के सड़ने का  खतरा बढ़ गया है, जो आलू सड़ेगा नहीं वो काला पड़ जाएगा। उसके दाम कम हो जाएंगे। लागत मिलना भी मुश्किल हो जाएगा। यूपी और पंजाब में ज्यादा नुकसान होना बताया जा  रहा है। आलू उत्पादक किसान समिति के महामंत्री आमिर ने बताया कि यूपी में 30 से 35 करोड़ पैकेट आलू का उत्पादन होता है। गौरतलब रहे कि एक पैकेट का वजन 50 किलो   होता है। इसमें से सबसे ज्यादा आलू का उत्पादन आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, अलीगढ़, कन्नौज और फर्रुखाबाद में होता है। इसमें से 25 करोड़ पैकेट कोल्ड स्टोरेज में रख दिया जाता  है, जो धीरे-धीरे बाजार में सप्लाई होता है। बाकी का 5 से 10 करोड़ पैकेट खेतों से सीधे बाजार में बेच दिया जाता है। आमिर आलू वाला बताते हैं कि इस बार आलू की फसल बहुत  अच्छी हुई थी। इतना ही नहीं लागत के मुकाबले बाज़ार का रेट भी अच्छा चल रहा है। 50 किलो आलू की लागत इस बार 625 रुपए आई थी। वहीं बाजार में आलू की खरीद 700 से   750 रुपए प्रति 50 किलो बोरी चल रही है। इस तरह से हर एक बोरी पर 75 से 125 रुपए बोरी का मुनाफा होने की पूरी उम्मीद थी। अब खेतों में पानी भर गया है, तो 15 दिन से  पहले जमीन में दबे आलू का हाल मिलना भी मुश्किल है। लेबर भी होली मनाने घर चले गए हैं। सच पूछो तो अब हमारी किस्मत जमीन में दबी हुई है। पंजाब से कंफेडरेशन ऑफ  पोटैटो सीड्स फारमर्स के अध्यक्ष सुखजीत सिंह भाटी बताते हैं कि हमारे यहां उत्पादन का 80 फीसदी आलू बीज के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। पश्चिम बंगाल और कर्नाटक आलू बीज खरीदने वाले हमारे दो सबसे बड़े ग्राहक हैं और दूसरी जगहों पर भी बीज जाता है, लेकिन उतना नहीं। बीते तीन-चार साल से पंजाब का आलू किसान लगातार घाटा उठा  रहा था, जिसके चलते इस बार बुवाई कम हुई। दूसरी ओर बुवाई के वक्त बारिश होने लगी तो बुवाई और कम रह गई। अब आलू जब जमीन से निकालने का वक्त आया तो फिर  से बारिश हो गई, जिससे आलू के खराब होने का जोखिम बढ़ गया है। बीते कुछ साल पहले तक पंजाब में तीन से साढ़े तीन करोड़ आलू के पैकेट का उत्पादन होता था, लेकिन अब  इसमें 20 से 25 फीसदी की कमी आई है।
Labels:

Post a comment

[blogger]

MKRdezign

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget