गोली मारो बयान पर भड़के अनुराग ठाकुर

पत्रकारों से बोले- आधी-अधूरी जानकारी खतरनाक

Anurag Thakur
चंडीगढ़
दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान कथित रूप से नफरत भरे भाषण देने की वजह से विपक्ष के निशाने पर आए केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने रविवार को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी  में हिंसा फैलाने में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। हिंसा में करीब 40 लोगों की मौत हुई है। वित्त एवं कार्पोरेट मामलों के राज्यमंत्री ने आयकर विभाग द्वारा कारोबार एवं उद्योग के विभिन्न प्रतिनिधियों से संवाद के लिए आयोजित कार्यक्रम के बाद संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही। संवाददाता सम्मेलन में  जब अनुराग ठाकुर और भाजपा नेताओं की ओर से चुनाव के दौरान दिए गए घृणा भाषण और दिल्ली हिंसा के बारे में पूछा गया तो केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 'जो लोग दिल्ली हिंसा  शामिल हैं उन पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। हमारे देश की ताकत विभिन्न धर्मों के लोगों का एक साथ रहना और राष्ट्र निर्माण में सामूहिक योगदान देना है।' उन्होंने कहा कि  'पुलिस अपना काम कर रही है।' उनके कथित घृणा भाषण के बारे में पूछे जाने पर ठाकुर ने कहा कि 'मेरा मानना है कि चीजों को पेश करने के तरीके में कई बार मीडिया में भी  सूचना की कमी होती है।' इस मुद्दे पर बात करने से बचते हुए ठाकुर ने देश की अर्थव्यवस्था पर बात की। उन्होंने कहा कि 'भारत को आगे बढ़ना चाहिए। हमने अर्थव्यवस्था के  मामले में कई बड़े कदम उठाए हैं और भविष्य में भी ऐसे फैसले लेंगे...' ठाकुर ने कहा कि 'सोमवार से संसद का सत्र शुरू होगा और अर्थव्यवस्था सहित विभिन्न मुद्दों पर संसद के  मंच पर भी सवाल उठाए जा सकते हैं एवं विभिन्न मुद्दों पर जवाब दिया जाएगा।' ठाकुर ने कथित रूप से उनके द्वारा घृणा भाषण दिए जाने को लेकर पत्रकारों के सवाल पर कहा   कि 'अगर आपके पास अर्थव्यवस्था से जुड़े सवाल हैं, तो उन्हें पूछिए...' पत्रकारों ने जब उनके कथित घृणा भाषण को उद्धृत कर सवाल किया, तो ठाकुर ने कहा कि 'ये उन्होंने नहीं   कहा था।' इस मामले पर कोई भी टिप्पणी करने से इंकार करते हुए भाजपा नेता ने कहा कि 'मामला न्यायालय में विचाराधीन है। आपके (मीडिया) पास सभी तथ्य (कथित घृणा  भाषण से जुड़े) हैं। आधी-अधूरी सूचना खतरनाक होती है।' उल्लेखनीय है कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने भाजपा नेताओं द्वारा संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) को लेकर हुई हिंसा  के मुद्दे पर कथित तौर पर दिए गए घृणा भाषण के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने में पुलिस की नाकामी पर नाराजगी जताई थी और पुलिस आयुक्त को सोच समझकर पर फैसला लेने को कहा था।

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