दिल कि बीमारी पर उपचार करना आसान

इंटरवेंशनल कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. अमित शर्मा और डॉ. ब्रायन पिंटो के नेतृत्व में एक टीम ने 88 वर्षीय मरीज डॉ. एमबी शाह, जिन्हें ह्रदय में प्रमुख अवरोधों को निकालने के लिए  अस्पताल में दाखिल किया गया था। एक जटिल और सख्त कैल्सिफाइड अवरोध को कोरोनरी शॉकवेव लिथोट्रिप्सी नामक नई तकनीक का इस्तेमाल करते हुए मुंबई में पहली बार  सफलतापूर्वक ऑपरेशन पूरा किया। बुजुर्गों में कैल्शियम धीरे-धीरे विकसित होता है और कुछ समय बाद ह्रदय की धमनियों के अंदर सख्त रूप में जमा हो जाता है। ये धीरे-धीरे विकसित होता है, लेकिन जब कैल्सिफाइड (दृढ़) घावों में सर्जरी की जाती है, तो इसके असर से तुरंत सामना होता है। कैल्शियम की सख्त संरचना धमनियों की सामान्य गतिविधियों  को सीमित कर देती है, जिससे सामान्य रक्त प्रवाह फिर से शुरू करने के लिए धमनियों के भीतर प्लाक को संकुचित करने के लिए तैयार की गई पारंपरिक बलून थेरेपी के प्रति  कठोर धमनियों के ऊतक (टिशु) प्रतिरोधी बन जाते हैं। कैल्शियम की मौजूदगी के चलते ज्यादातर मामलों की जटिलता बढ़ जाती है और ़ज्यादातर उपचारों का असर कम हो जाता   है।
उन्होंने ने कहा कि कई वर्षों तक कोरोनरीज के ईर्द-गिर्द जमा कैल्शियम जटिल कोरोनरी आर्टरी डिसीज से पीड़ित बुजुर्ग और डायबेटिक मरीज़ों का उपचार करना मुश्किल कर देता  है। इन धमनियों में मौजूद कैल्शियम इतना सख्त होता है कि इससे स्टेंट के लिए जगह तैयार करने वाले आमतौर पर इस्तेमाल होनेवाले बलून ही फट जाते हैं। इंट्रावास्क्यूलर लिथोट्रिप्सी (आईवीएल) को कैल्सिफाइड (दृढ़) धमनी अवरोधों को तोड़ने हेतु सोनिक प्रेशर वेव्ज उत्पन्न करने के लिए तैयार किया गया है, जिसे लंबे समय से किड़नी पथरी के  मरीजों के उपचार में इस्तेमाल किया जाता रहा है। नई तकनीक के इस्तेमाल से जिन बुजुर्ग मरीजों की धमनियों में कैल्शियम जमा होता है, उनमें रक्त प्रवाह के लिए स्टेन्ट डालने  हेतु एंजियोप्लास्टी करना आसान हो जाता है।

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