बच्चों को रखना चाहती हैं स्ट्रेस फ्री तो जीवन में ये बदलाव हैं बेहद जरूरी

Mother Daughter
कहते हैं ना कि मां का असर तो बच्चे पर पड़ेगा ही। फिर आप यह क्यों नहीं समझ रही हैं कि आपका तनाव बच्चे की जिंदगी पर भी तो असर डालेगा। कैसे अपने तनाव के इस जाल में बच्चे को फंसने से बचाएं, बता रही हैं सुमन बाजपेयी मीता जब स्कूल में पढ़ती थी तो स्कूल में उसे हमेशा दूसरे बच्चे किसी न किसी बात पर चिढ़ाया करते थे। उसका  असर यह हुआ है कि आज तक जब भी वह किसी फंक्शन में जाती है तो उसे यही डर लगा रहता है कि कोई उसका मजाक न उड़ा दे। बात यहीं तक सीमित नहीं रही। जब मीता  की बेटी पहले दिन स्कूल जाने लगी तो मीता ने अपनी बेटी से कहा, अगर तु्हारा कोई मजाक उड़ाए या तंग करे, तो सीधा टीचर से जाकर उसकी शिकायत करना। वह नन्ही-सी  बच्ची तब तक इन बातों को न तो जानती होगी या ना कभी सोचा होगा कि ऐसा भी कुछ हो सकता है, लेकिन मां की बात सुनने के बाद वह निश्चित रूप से इन स्थितियों पर गौर  करेगी और खुद चीजों को संभालने की बजाय मां की सीख पर चलेगी। वह हर उस छोटी-छोटी बात की शिकायत टीचर से करेगी, जो उसके हिसाब से नहीं होगी। धीरे-धीरे ऐसा करना   उसकास्वभाव बन जाएगा।
अपने तनाव पर काबू न कर पाना और दूसरे बच्चों के सामने किसी न किसी तरह से उसे व्यक्त कर देने के डर से उस छोटी-सी बच्ची के मन में तनाव इकठ्ठा होने लगेगा। आप विश्वास करें या न करें, पर इस तनाव का पहला बीज बच्ची के मन में बोने का काम उसकी मां ने ही किया। जॉन हॉपकिन्स चिल्ड्रेन्स सेंटर द्वारा किए गए एक अध्ययन के मुताबिक, इस बात की काफी आशंका होती है कि एंग्जाइटी या तनाव से जूझ रहे अभिभावकों के बच्चों को भी इसी तरह की समस्या से जूझना पड़े। अभिभावक जाने-अनजाने में  अपना तनाव बच्चे की जिंदगी में ट्रांसफर कर देते हैं। अगर आप चाहती हैं कि आपकी जिंदगी के इस पक्ष की परछाई भी आपके बच्चे के भविष्य पर न पड़े, तो आपको अपनी  जिंदगी में जरूरी बदलाव लाने होंगे।

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