अब मोनो रेल में होगी बर्थडे पार्टी!

monorail
मुंबई
मुंबई के चेंबूर से सात रास्ता के बीच चलने वाली मोनो रेल लगातार घाटे में जा रही है। घाटा रोकने के लिए अब विचार किया जा रहा है कि इसे बर्थडे पार्टी जैसे समारोहों के लिए  किराए पर दिया जाए। मोनोरेल का संचालन मुंबई मेट्रोपॉलिटन डेवेलपमेंट अथॉरिटी करती है। मोनोरेल नेटवर्क का मूलभूत ढांचा लार्सन एंड टूब्रो ने बनाया है, जबकि इसके डिब्बे मलेशियन कंपनी स्कोमी की ओर से आते हैं। भारत की पहली मोनोरेल की शुरूआत अब से सात साल पहले 2013 में हुई थी। रोजाना 97 सेवाएं चलाने के लिए इसे साढ़े 8 लाख  रुपए का घाटा हो रहा है। जब ये शुरू हुई थी तबसे ये घाटे में है। शुरूआत में ये सिर्फ वडाला से चेंबूर के बीच सिर्फ 8 किलोमीटर के पहले चरण में चलती थी। तब ये माना गया था  कि 20 किलोमीटर के पूरे रूट पर सेवाओं की शुरूआत होने के बाद घाटे में कमी आएगी। अब से सालभर पहले दूसरे चरण की शुरूआत भी हो गई, लेकिन मोनो रेल की आर्थिक   स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। दरअसल जानकारों के मुताबिक मोनोरेल के असफल होने के पीछे कई कारण हैं।
सबसे बड़ा कारण यह है कि इसकी फ्रीक्वेंसी काफी कम है। एक मोनोरेल के बाद दूसरी मोनोरेल आने में 30 मिनट से ज्यादा का इंतजार करना पड़ता है। दूसरा कारण है कि कई  मोनोरेल स्टेशन आबादी से दूर बनाए गए हैं जैसे भक्ति पार्क, वडाला टीटी और मैसूर कॉलोनी। इन इलाकों में रहने वाले लोगों को मोनोरेल स्टेशन तक पहुंचने में असुविधा होती है।  मोनोरेल की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ चुके हैं। एक बार मोनोरेल में चलते वक्त आग लग चुकी है। कई बार ऐसा हुआ कि मोनोरेल बीच रास्ते में ही अटक गई। ऊंचाई पर फंसे  मुसाफिरों को निकालने के लिए फायरब्रिगेड की मदद लेनी पड़ी। आए दिन तकनीकी खराबी की वजह से मोनोरेल बंद हो जाती है। अब माना जा रहा है कि मोनोरेल के डि बों को  जश्न के मौकों के लिए किराए पर देने से उसकी माली हालत सुधरेगी। जल्द ही कई और डिब्बे भी आयात किए जा रहे हैं, जिनसे मोनोरेल की बारंबारता भी बेहतर होगी और  मुसाफिर उसकी ओर खिचेंगें।
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