नेपाल का आत्मघाती कदम

अपनी भूमि पिपासा और विस्तारवादी नीति के लिए कुख्यात चीन से शह पाकर नेपाल ने भले ही भारत के खिलाफ आपत्तिजनक हरकतें की परन्तु अब नेपाल को भी चीन का कर्ज और डोनेशन डिप्लोमसी का उपयोग कर जमीन हड़पने की उसकी नीति का एहसास होने लगा है. इसके चलते प्रधानमंत्री ओली की नीतियों का विरोध शुरू हो गया है. वहां उनसे इस्तीफे की मांग होने लगी है और जन आन्दोलन भी खड़ा हो रहा है. कुल मिलाकर अपनी सत्ता बचाने की ओली की चाल जिसके तहत उन्होंने चीन के आभामंडल में आकर हमें शह देने की हिमाकत की अब उलटा पड़ती हुई दिखाई दे रही है. हमने यानि भारत ने जिस तरह नेपाल को हमेशा सर-माथे पर लिया और उसके सुख दु:ख में जिस तरह खड़े रहे उसके बाद जिस तरह ओली ने चीन के हाथों खेलने की हिमाकत की है वह सर्वथा निंदनीय है और इसका परिणाम वह भी श्रीलंका की तरह ही झेलेगा. श्रीलंका ने भी चीन के झांसे में आकर उससे अधाधुंध आर्थिक सहायता ली और ऐसी स्थिति आ गयी कि वह कर्ज वापस लौटाने में नाकाम हो गया. उसे अपना हंबनटोटा बन्दरगाह उसे 99 साल की लीज पर देना पड़ा और 15000 एकड़ जमीन भी देनी पडी. अब वह चीन को समझ चुका है और बन्दरगाह पुन: हासिल करने के लिए छटपटा रहा है और दोनों के रिश्तो में भी कमी आयी है. पाक को तो उसने कठपुतली ही बना लिया है और इसके चलते वहां की अवाम में भी चीन के खिलाफ आक्रोश है हमसे उलझने के बाद भी चीन ने नेपाल की ही तरह अपनी आर्थिक और डोनेशन डिप्लोमेसी का चारा एक बार फिर श्रीलंका और बांग्लादेश पर फेंकना शुरू किया है. चीन से पहले छला जा चुका और हाथ जला चुका श्रीलंका सावधान है तो बांगलादेश भी समझदारी का परिचय देते हुए अभी तक अपने आपको चीन के सब्जबाग से बचाए हुए है. नेपाल ने नादानी की है, तो उसे इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ेगा क्योंकि चीन ने हमारे संदर्भ में जो भी हिमाकत की है हमने उसका करारा जवाब दिया है इसके बाद भी यदि उसने कुछ उलटी सीधी हरकत की तो हम उससे निपटने को पूरी तरह सन्नद्ध है. यही नहीं अपनी भूमि पिपासा के चलते उसने जिन दर्जनों देशों से पंगा लिया है वह भी मौके की ताक में हैं. तिब्बती और ताइवान के लोग,उसके विरोध में मुखर हो रहे है, हांगकांग में जन आन्दोलन तेज हो रहा है, उइगर मुसलामानों पर अत्याचार का मामला भी तेजी से उठ रहा है. अमेरिकी सेना समुद्री दबाव बना रही है. चीन ने कोरोना के जन्मदाता और पूरी दुनिया में उसका प्रसारक बनकर जो दुनिया का बेड़ा गर्क किया है उसके चलते भी चीन के प्रति पूरी दुनिया में आक्रोश है.
ऐसे में चीन चारों और से घिर रहा है हमने एक साथ चीन पाक और नेपाल तीनों की हिमाकतों का करारा जवाब देकर यह जता दिया है कि हम अपनी सीमाओं की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम है. चीन ने दुस्साहस तो किया परन्तु अब वह अपने जाल में खुद फंसता नजर आ रहा है. वह कैसा दोस्त है इसे पाकिस्तान अच्छी तरह जानता है. हमारी सामरिक और कूटनीतिक पिटाई के समय चीन भी तमाशा ही देखने के लिए बाध्य रहा और आज जब वह खुद हमारे खिलाफ अपने बुने जाल में फंस गया है और कोरोना को फैलाने वाले देश के रूप में दुनिया का कोपभाजन है और अपनी भूमि पिपासा और विस्तारवादी नीतियों के चलते दर्जनों से ज्यादा देशों से सीमा विवाद में उलझा है. वह अपनी मौत खुद मरेगा तब नेपाल जैसे देशों का जिसके ओली जैसे नेताओं ने अपनी सत्ता पिपासा और अवसरवादी नीति के चलते हम जैसे वफादार और मजबूत पड़ोसी से बेवफाई करने का काम किया है .पीठ में छुरा भोंका है. उसका अंजाम क्या होगा, यह नेपाल को सोचना चाहिए. यह आत्मघाती कदम है और जिसका पता ओली और नेपाल को जल्द चलेगा, जिन-जिन देशों ने चीन की छाया स्वीकारी है यही हुआ है और नेपाल के साथ भी यही होगा.

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