बंदरगाहों पर हो रही है चीनी सामानों की कड़ी जांच

मुंबई
चीन के नाम ही अब उस पर नकेल कसी जाएगी। भारत और चीन के बीच लद्दाख में जारी तनाव का असर अब ड्रैगन के कारोबार पर पड़ने लगा है। चीन को सबक सिखाने के लिए  भारत उसे आर्थिक से सामरिक मोर्चे दोनों पर घेर रहा है। ऐसे में चीन से आने वाले सामानों की बंदरगाहो से लेकर एयरपोर्ट पर कस्टम के अधिकारी कड़ी जांच-परख कर रहे हैं।  हालांकि इस बाबत सरकार से कोई लिखित या मौखिक आदेश नहीं है। वहीं, एक अधिकारी ने बताया कि कोई खुफिया इनपुट के बाद सामानों की जांच की जा रही होगी। बता दें कि  लद्दाख में भारत और चीन के बीच एक महीने से ज्यादा वक्त से तनाव चल रहा है और वहां दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने हैं।
उद्योग एवं आंतरिक व्यापार प्रोत्साहन विभाग(डीपीआईआईटी) ने बुधवार को अमेजन और ब्लिपकार्ट जैसी ई- वाणिज्य प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने वाली कंपनियों से उनके प्लेटफॉर्म पर  बिकने वाले प्रत्येक उत्पाद पर उनके उद्गम देश का नाम अंकित किए जाने के बारे में उनके विचार मांगे हैं। सूत्रों ने यह जानकारी दी है। सूत्रों ने बताया कि ई- वाणिज्य कंपनियों ने  कहा है कि इस प्रकार की सूचना को उत्पादों पर दर्शाने का काम हो सकता है, लेकिन इसे अमल में लाने के लिए उन्हें कुछ समय देना होगा। ऐमजॉन, ब्लिपकार्ट, स्नेपडील, टाटा  फ्लिक, पेटीएम, उड़ान और पेप्परफ्राई ने वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए इस बैठक में भाग लिया। यह बैठक ऐसे समय हुई है, जब लद्दाख सीमा पर भारत और चीन के बीच तनाव बना  हुआ है और देश में चीन में बने सामान के बहिष्कार को लेकर आह्वान किया जा रहा है। कस्टम अधिकारियों की सख्ती के कारण चीन के इलेक्ट्रॉनिक्स लेकर फार्मा के सामान पर  बंदरगाह और एयरपोर्ट पर बड़ी मात्रा में पड़े हुए हैं। पूरे देश में कस्टम अधिकारी चीन से आने वाले सभी शिपमेंट की कड़ी जांच कर रहे हैं। हालांकि एक्साइज विभाग को इस बात के  लिए आधिकारिक तौर पर नहीं बताया गया है, लेकिन अधिकारी काफी सख्ती बरत रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि बंदरगाह और एयरपोर्ट पर चीनी सामानों का बैकलॉग बढ़ता जा रहा है।  यहां तक कि फेडेक्स और डीएचल जैसी सामान ढोने वाली कंपनियां बुधवार से नए ऑर्डर नहीं ले रही हैं। देश के सबसे बड़े बंदरगाह और मुंबई के दक्षिण में स्थित न्हावा शेवा में भी  चीनी सामानों को रोके जाने की खबरें हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार चीन से करीब 68 फीसदी एपीआई (एक्टिव फार्मास्यूटिकल इनग्रेटीयेंट) का आयात किया जाता है। एपीआई वह  कच्चा माल है, जो किसी भी दवा बनाने के लिए सबसे जरूरी होते हैं। केमिकल एंड फर्टिलाइजर मिनिस्टर डीवी सदानंद गौड़ा के अनुसार पिछले तीन सालों में भारत ने 68 फीसदी  एपीआई का आयात किया है। बाकी का आयात जर्मनी, स्वीडन और इटली जैसे देशों से होता है। भारत में चीन से करीब 53 अहम फार्मा एपीआई आते हैं, जिनका इस्तेमाल टीबी की  दवा, स्टेरॉइड और विटामिन बनाने में किया जाता है।
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