कीमत के गणित से समझें क्यों इतना महंगा हो गया डीजल-पेट्रोल

Petrol
नई दिल्ली
दुनियाभर की अर्थव्यवस्था पर कोरोनावायरस के प्रभाव से कच्चे तेल कीमतों में बड़ी गिरावट हुई है। हालात यहां तक आ गए हैं कि पिछले दिनों अमेरिकी बाजार में इसकी क्यूचर  प्राइस नेगेटिव में चली गई थी। हालांकि अभी क्रूड की कीमत में थोड़ा बदलाव हुआ है लेकिन तब भी इतना तो नहीं कि आपको दिल्ली में पेट्रोलडीजल 80 रुपये लीटर से ज्यादा  मूल्य पर मिले। यहां सवाल उठता है कि दुनिया भर के बाजारों में कच्चे तेल की कीमत 40 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है तो हमें पेट्रोल-डीजल इतना महंगा क्यों मिल रहा है?  भारत में पेट्रोलियम पदार्थों की मांग भले ही तेजी से बढ़ी हों, लेकिन उत्पादन पर्याप्त नहीं है। ऐसे में हमें अपनी आवश्यकता का करीब 85 फीसदी कच्चा तेल आयात करना पड़ता है।  जाहिर है कि यदि विदेशी बाजार में यह महंगा होता तो घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल महंगा होगा और कच्चा तेल सस्ता होगा तो पेट्रोलियम उत्पाद सस्ता होता है तो यह सस्ता  होगा। लेकिन अभी ऐसा दिख नहीं रहा है। आइए, हम समझाते हैं कि आपके एक लीटर पेट्रोल की कीमत में क्या क्या शामिल है।
तेल के खेल में सरकार का बड़ा हाथ पिछली बार साल 2014 से 2016 के बीच कच्चे तेल के दाम तेजी से गिर रहे थे तो सरकार इसका फायदा आम लोगों को देने के बजाय  एक्साइज ड्यूटी प्लस रोड सेस के रूप में अपनी आमदनी बढ़ाती रही। नवंबर 2014 से जनवरी 2016 के बीच केंद्र सरकार ने 9 बार एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई और केवल एक बार  राहत  दी। ऐसा करके साल 201415 और 2018-19 के बीच केंद्र सरकार ने तेल पर टैक्स के जरिए 10 लाख करोड़ रुपये कमाए।
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