बिजली कंपनियों के खिलाफ हो कार्रवाई : फड़नवीस

मुंबई
विधानसभा के विरोधी पक्ष नेता और पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने राज्य के मुख्यमंत्री उध्दव ठाकरे को पत्र लिखकर किसानों की मदद करने की मांग की है.जिसमे उन्होंने कहा है कि बीते तीन महीने में कोरोना महामारी के कारण शुरू लॉकडाउन के कारण राज्य की जनता जहां आर्थिक स्थिति से जूझ रही है.वही दूसरी तरफ राज्य की महाविकास आघाडी सरकार की तरफ से मिलने वाली सब्सिडी बंद भी कर दी है. मुख्यमंत्री ठाकरे को लिखे गए अपने पत्र में देवेंद्र फड़नवीस ने कहा कि राज्य में मानसून शुरू होने के बाद खेतों के बुआई के लिए किसानों को बीज नहीं मिल रहा है. जिसके चलते राज्य के कई इलाकों में बीजों की ब्लैकमेलिंग शुरू है जो किसानो को महंगे दाम में नकली बीज बेचे जा रहे है.उन्होंने ब्लैकमेलिंग करने वाले दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की गई है।बीते तीन महीने में लॉकडाउन के दौरान उपयोग की जाने वाली घर में बिजली के बिल में कंपनियों ने वृदि करके बिल भेजा है जिसकी जांच कर दोषी बिजली कंपनियों के खिलाफ कारवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बीते तीन महीने में रोजगार और व्यापार बंद होने के कारण बिजली घरेलू उपभोक्ता को भारी वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। जब किसान पहले से ही कोरोना संकट के दौरान पीड़ित था, अब वह फर्जी बीज के कारण एक और संकट का सामना कर रहा है। राज्य के सभी हिस्सों में, विशेषकर विदर्भ और मराठवाड़ा में, किसानों की आर्थिक स्थिति बहुत खराब है। फर्जी महाबीज द्वारा प्रदान किए गए थे, किसानों को किस पर भरोसा करना चाहिए.
सरकारी सब्सिडी न मिलने के कारण महाबीज ने इस साल 1,700 रुपये के बजाय 30 किलोग्राम का सोयाबीन 2,300 रुपये में बेचा जा रहा हैं। इस पैसे को खर्च करके भी किसानों को छला महशुस कर रहा हैं। विरोधी पक्ष नेता ने कहा कि राज्य में स्थिति यह है कि सोयाबीन के बीज अंकुरित नहीं हुए हैं। बिजली कंपनियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कंपनियों पर कारवाई की मांग करते हुए फड़नवीस ने कहा कि कोरोना के कारण 3 महीने के लिए तालाबंदी हुई थी। इन तीन महीनों के दौरान, घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली बिल बढ़ाकर भेजा गया है. इस तरह की फर्जी काम करने वाले बिजली बिल कंपनियों के खिलाफ सरकार सक्त कारवाई करें।उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि तीन महीने के बिजली बिल के अचानक आने से उन्हें एकमुश्त भुगतान करने की समस्या का सामना करना पड़ा रहा है। नागरिकों के पास दसों हज़ार रुपये तक के बिल आ गए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और विरोधी पक्ष नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया आत्मनिर्भरता अभियान ने विभिन्न राज्यों में बिजली वितरण कंपनियों को पावर फाइनेंसकॉरपोरेशन (पीएफसी) और ग्रामीण विकास निगम (आरईसी) के माध्यम से लगभग 90,000 करोड़ रुपये का ऋण देने की अनुमति दी है।
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