फिर मुंबई और दिल्ली वापस होने लगे प्रवासी

गोरखपुर
लॉकडाउन में परदेस से घर लौटे पूर्वांचल और बिहार के कामगारों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। जो पैसे बचाकर रखे थे, वे खर्च हो गए। घर खर्च का चलाना भारी पड़ रहा है। कोई कल-कारखाना है नहीं, जहां नौकरी मांगने जाएं। गांव में प्रधान सुनता ही नहीं। व्यवसाय के लिए न पैसे हैं और न समझ। बाजार भी मंदा है। अब तो वही मालिक फिर से भगवान जैसा दिखने लगा है, जिसने कंपनी में ताला लगाकर सड़क पर छोड़ दिया था। निराश और बेदम होकर श्रमिक ट्रेनों के सहारे घर पहुंचे कामगार अब स्पेशल ट्रेनों से वापस होने लगे हैं। दिल में संक्रमण का डर है, लेकिन पेट की आग से महामारी रूपी पैरों की बेडिड़ां भी पिघल गई हैं। अब तो सिर्फ परिवार दिख रहा और रोजी-रोटी।
गांव में प्रधान सुनता नहीं, कंपनी से आ गया बुलावा
गोरखपुर के प्लेटफार्म नंबर दो पर दिल्ली के रास्ते हिसार जाने वाली गोरखधाम स्पेशल खड़ी थी। यात्री बोगियों में चढ़ रहे थे। कुछ युवा प्लेटफार्म पर ही चुपचाप बैठे थे।
उत्सुकता हुई तो पूछ बैठा, कहां जाना हैड़ नासिक, लेकिन यह ट्रेन तो दिल्ली जाएगी। मुंबई वाली ट्रेन कुशीनगर एक्सप्रेस शाम सात बजे यहीं से जाएगी। हमलोग पहले ही आ गए हैं। युवाओं में से एक निखिल ने बताया कि वे सभी पगरा (बसंतपुर) कुशीनगर के रहने वाले हैं। 17 मई को श्रमिक स्पेशल ट्रेन से आए थे। उन्ड़होंने कहा कि घर बैठकर कब तक खाएंगे। कोई रोजगार नहीं मिल रहा। बड़ा भाई मनरेगा में काम करता है। प्रधान भी सुनता नहीं। आखिर कहां जाएं, किससे नौकरी मांगे। बीच में ही अनिल बोल पड़ा। जिस कंपनी में काम करते थे, उसके मालिक ने टिकट करा दिया है। वहां एक सप्ताह क्वारंटाइन में रखेगा। फिर काम में जुट जाएंगे। संक्रमण से डरेंगे तो परिवार और बच्चों का क्या होगा।
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