एक सूत्रधार ऐसा भी

तेलंगाना सरकार द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव की जन्मशताब्दी को जोर शोर से मनाने का एलान निसंदेह कांग्रेस पार्टी को परेशान करने वाला है. नरसिम्हा राव ने देश का नेतृत्व उस समय संभाला था जब देश की आर्थिक हालत खराब थी, राजीव गाँधी की दुखद हत्या के बाद देश का राजनैतिक माहौल अस्थिर था. उसके पहले देश वी पी सिंह और चंद्रशेखर की अल्प कालीन सरकारों को झेल चुका था . देश की हालत इतनी पतली थी कि देश को सोना तक गिरवी रखना पड़ा था देश में रामजन्म भूमि आन्दोलन चरम पर था. शीत युद्ध का काल समाप्ति पर था और सोवियत संघ विखंडित हो चुका था. चुनाव में कांग्रेस बहुमत तो नहीं पा सकी थी परन्तु ऐसी स्थित में थी कि वह सरकार बना ले. ऐसे समय में देश को एक ऐसे नेता की दरकार थी जो इन तमाम झंझावातों के बीच देश की गाड़ी इस तरह से चलाये कि वह पटरी पर आ सके. कांग्रेस में उस समय भी कई विकल्पों पर विचार हुआ परन्तु अंतत: राव का व्यापक अनुभव .उनकी वरिष्ठता और बौद्धिक धमक ने उनके प्रधान मंत्री बनने का रास्ता खोल दिया. गौरतलब है कि उन्होंने चुनाव भी नहीं लड़ा था वे प्रधानमंत्री बनने के बाद चुनाव जीत कर सांसद बने. राव ने अपने कार्यकाल में जिस तरह देश का नेतृत्व किया और देश में आर्थिक सुधारों का श्रीगणेश किया वह सराहनीय है. उन्होंने ही मनमोहन सिंह को वित्त मंत्री बनाया और लाइसेंस राज को खत्म करने की शुरुवात की. देश में उदारीकरण और वैश्वीकरण के नए युग के आगाज का नेतृत्व किया. देश का सोना वापस लाया गया और अयोध्या में विवादास्पद ढांचे का बिध्वंस और उसके बाद दंगे की घटना को छोड़ दें तो उनका कार्यकाल भारत की आर्थिक और कूटनीतिक नीति के क्रांतिकारी बदलाव का काल रहा है परन्तु कांग्रेस उनके योगदान के साथ न्याय नहीं कर पाई क्योंकि उनके सबंध गाँधी परिवार से ठीक नहीं थे इसलिए कांग्रेस में तो उनका उल्लेख भी नहीं होता दिखता और उनके मृत्यु के समय जिस तरह उनके पार्थिव शरीर को पार्टी मुख्यालय में नहीं रखा गया. दिल्ली के बजाय उनका अंतिम संस्कार हैदराबाद में किया गया,जो देश में एक बड़े वर्ग को नहीं रास आया. प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के युग में उनका योगदान हमेशा याद किया जाता है. स्वयं प्रधान मंत्री भी उसका उल्लेख करते रहते है और पूर्व की आन्ध्र की टीडीपी (तेलगू देशम पार्टी) सरकार और आज की तेलंगाना सरकार दोनों ने इस दिशा में कदम उठाया है कि उनकी स्मृति देश में अक्ष्क्षुण रहे. टीडीपी ने स्मारक की पहल की जिसमें केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार का सहयोग मिला और अब तेलंगाना सरकार जन्म शतादी वर्ष मना रही है कांग्रेस ने अपने अंदरुनी कारणों से एक कर्मठ और ऐतिहासिक भूमिका निभाने वाले व्यक्ति का अवमूल्यन कर अपना ही नुकसान किया. इससे इन बातों की पुष्टि होती है कि कांग्रेस में नेहरु गांधी परिवार ने हमेशा सिर्फ अपने परिवार का महिमा मंडन किया हैं. अन्य नेताओं के योगदान को वह तवज्जो नहीं दी गयी जो उन्हें दी जानी चाहिए थी और जिसका परिणाम है कि कांग्रेस पीछे सरकती जा रही है और आंध्र और तेलंगाना में आज भी कांग्रेस की स्थिति नगण्य है. भले ही कांग्रेस नरसिम्हा राव को उनका यथोचित सम्मान देने में विफल रही परंतु देश नरसिम्हा राव को नहीं भूल है. एक मुद्दे पर जरूर विवाद खड़ा हुआ परंतु पूरी समग्रता सें उनके कार्यकाल का मूल्यांकन यह दर्शाता है कि एक कठिन दौर में उन्होने अपने साहसिक कदमों और निर्णयों से देश को नयी दिशा दी और अस्थिर राजनैतिक और आर्थिक माहौल से देश को उबारा और नयी आर्थिक नीति की आधारशिला रखी और देश में नए युग के सूत्रधार बने.

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