तनाव के बीच आज भारत-चीन कोर कमांडरों की बातचीत

Indo China Soldiers
नई दिल्ली
ईस्टर्न लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर गतिरोध खत्म करने और तनाव दूर करने के लिए एक बार फिर भारत और चीन की सेना के बीच कोर कमांडर स्तर की मीटिंग होगी।

चुशूल में होगी मीटिंग
सूत्रों के मुताबिक इस बार मीटिंग चुशूल में होगी। यह भारत की तरफ बना बॉर्डर पर्सनल मीटिंग (बीपीएम) पॉइंट है। भारत की तरफ मीटिंग होने का यह मतलब है कि मीटिंग की पहल भारत की तरफ से की गई है और भारत ने मीटिंग बुलाई है। इससे पहले दो बार कोर कमांडर स्तर की मीटिंग हो चुकी हैं। दोनों बार मीटिंग चुशूल के सामने मॉल्डो में हुई। मॉल्डो चीन की तरफ है।

पहले हुई बातचीत के बाद भी गतिरोध खत्म नहीं
22 जून को हुई कोर कमांडर स्तर की मीटिंग में दोनों पक्षों ने तय किया था कि गतिरोध खत्म किया जाएगा और धीरे धीरे सैनिकों को एलएसी से पीछे किया जाएगा। इस पर कैसे आगे बढ़ना है फिर बातचीत करने की सहमति बनी थी। लेकिन इसके बाद एक हफ्ता गुजर गया एलएसी पर हालात बदले नहीं। बल्कि इस बातचीत के बाद भी चीन की तरफ से सैनिकों की संख्या बढ़ाई जाती रही और पैंगोंग एरिया में फिंगर- 4 से फिंगर-8 के बीच चीनी सेना निर्माण काम भी करती रही।

चीन ने किया दावा
चीन गतिरोध खत्म करने के बजाय लगातार गलवान वैली पर अपना दावा जताता रहा। चीन ने डेपसांग प्लेन्स में भी सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी और सैन्य साजो सामान का जमावड़ा लगा दिया। भारत ने भी पूरे एलएसी में अपने सैनिकों की तैनाती बढ़ाई है। सूत्रों के मुताबिक चीन फिंगर-4 से पीछे हटने को तैयार नहीं है।

भारत की ओर से कड़ा संदेश

भारत की तरफ से भी कड़ा संदेश दिया गया कि गतिरोध खत्म करने की जिम्मेदारी चीन पर है क्योंकि चीन ने ही इसकी शुरूआत की। चीनी सैनिकों ने भारतीय सेना की पट्रोलिंग में बाधा पैदा की और एलएसी पर यथास्थिति बदलने की कोशिश की। भारत की तरफ से यह भी साफ किया गया है कि भारत अपने इलाके में निर्माण काम जारी रखेगा और चीन को इस पर आपत्ति जताने का कोई हक नहीं है।

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