कोरोना: दो दिन में एक लाख केस

Corona patient
नई दिल्ली
भारत में कोरोना वायरस की रफ्तार दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। आंकड़ों के मुताबिक देश में 2 दिनों में लगभग 1 लाख कोरोना के मामले सामने आ रहे हैं। गुरुवार को कोरोना वायरस के कुल केसों की संख्या बढ़कर 16 लाख से ज्यादा हो गई। वहीं, संक्रमण से मरने वालों की तादाद भी बढ़कर 35,134 हो गई है।
कोरोना वायरस के आंकड़ों पर नजर रखने वाली वेबसाइट वर्ल्डोमीटर के अनुसार, भारत में कोरोना वायरस के कुल मामलों की संख्या 1,601,070 हो गई है, जबकि मृतकों की संख्या 35,134 है। इस घातक वायरस के संक्रमण से अबतक 1,029,069 लोग ठीक हो चुके हैं। कोरोना संक्रमण के मामलों में महाराष्ट्र अब भी शीर्ष पर बना हुआ है, जबकि दूसरे स्थान पर तमिलनाडु और तीसरे स्थान पर राजधानी दिल्ली काबिज है।

कोविड-19 की रोजाना 10 लाख जांच करने की योजना
विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री हर्षवर्धन ने बृहस्पतिवार को कहा कि देश में हर दिन कोविड-19 की करीब पांच लाख जांच की जा रही है और अगले एक-दो महीने में यह दोगुनी हो जाएगी। कोविड-19 से मुकाबले के लिए वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की प्रौद्योगिकी पर एक संग्रह को जारी करते हुए हर्षवर्धन ने कहा कि देश में ठीक होने की दर 64 प्रतिशत से अधिक है और मृत्यु दर 2.2 प्रतिशत है । केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने वायरस से निपटने में चिकित्सा बिरादरी के साथ योगदान दे रहे वैज्ञानिक समुदाय की भी सराहना की ।
हर्षवर्धन ने कहा कि भारत में कोविड-19 का पहला मामला 30 जनवरी को आया था और छह महीने हो चुके हैं लेकिन लड़ाई अब भी जारी है । विशाल देश और बड़ी आबादी होने के बावजूद हर मोर्चे पर वायरस के खिलाफ कामयाबी से निपटा गया है। देश में स्वास्थ्य ढांचे को चुस्त-दुरूस्त किए जाने पर मंत्री ने कहा कि छह महीने पहले देश में वेंटिलेटर का आयात होता था लेकिन अब तीन लाख वेंटिलेटर निर्माण की क्षमता तैयार हो गयी है । उन्होंने कहा, अब अधिकतर वेंटिलेटर देश के भीतर ही बनाए जा रहे हैं । भारत करीब 150 देशों को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा की आपूर्ति कर रहा है।

रिकवरी रेट बढ़ा

स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण ने देश में कोरोना की स्थिति को लेकर जानकारियां दीं। भूषण ने कहा कि देश में कोरोना से ठीक होने की दर (रिकवरी रेट) में सकारात्मक रुख देखने को मिल रहा है। अप्रैल में यह दर 7.58 फीसदी थी जो आज 64.4 फीसदी हो गई है। भारत जैसे बड़े आकार और बड़ी जनसंख्या वाले देश में हर्ड इम्यूनिटी एक बेहतर रणनीतिक विकल्प नहीं हो सकता है।

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