आघाड़ी सरकार में कोई तालमेल नहीं : पाटिल

मुंबई
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल का मानना है कि राज्य की महाविकास आघाड़ी सरकार आपसी अंतर्कलह के कारण गिरेगी, लेकिन इसमें समय लग सकता है। उनका कहना है कि महाविकास आघाड़ी सरकार कोरोना से निपटने में विफल साबित हुई है। राज्य के वर्तमान राजनीतिक हालत सहित अन्य मुद्दों पर पेश है, उनसे हुई बातचीत के अंश:

महाराष्ट्र और मुंबई में लगातार कोरोना बेकाबू होता जा रहा है, इस पर आप क्या कहेंगे?
यह बड़ी चिंता का विषय है। मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है। कोरोना के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है, इससे महानगर के आर्थिक विकास को ठेस पहुंचेगी। कोरोना के अधिक टेस्ट कराने की जरूरत है, अगर ज्यादा जांच होगी तो संक्रमितों को ठीक करने में आसानी होगी, लेकिन अगर लक्षण छिपाए गए तो यह घातक साबित होगा। टेस्ट ज्यादा होंगे तो लोगों का कोरोना के प्रति डर खत्म हो जाएगा।

कोराना से निपटने में महाविकास आघाड़ी सरकार विफल साबित हुई है?
सरकार पूरी तरह विफल साबित हो रही है। इसकी वजह सरकार में आपसी तालमेल न होना। सुबह सरकार एक निर्णय लेती है और शाम को बदल देती है। सरकार में शामिल तीनों दल अलग-अलग निर्णय लेते हैं। पूरे राज्य में एक जैसा लॉकडाउन होना चाहिए। देश में एक तिहाई रोगी महाराष्ट्र में हैं और मृत्यु दर भी बाकी राज्यों से अधिक है।

उद्धव ठाकरे राज्य का नेतृत्व करने में सक्षम नजर आ रहे हैं?
उद्धव ठाकरे एक अच्छे नेता हैं। उन्होंने दिन-रात मेहनत की। शिवसेना प्रमुख बाला साहेब ठाकरे के देहांत के बाद कई लोगों ने कहा कि शिवसेना फूटेगी, शिवसैनिक अन्य दलों में चले जाएंगे, लेकिन उद्धव ठाकरे ने हालत को संभाला और शिवसेना को फूटने नहीं दिया। वे अच्छे राजनेता हैं, लेकिन उन्हें प्रशासन का शून्य अनुभव है। उन्होंने लोगों से सलाह ली और उनकी सलाह को माना।

क्या महाविकास आघाड़ी सरकार अपना कार्यकाल पूरा कर लेगी?
सत्ता एक फेविकॉल की तरह होती है। इसी फेविकॉल ने उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाया है। मेरा मानना है कि सरकार गिरने में वक्त लग सकता है, क्योंकि गले तक पानी आने तक वे सरकार चलाएंगे, जब लगेगा कि अब पानी गले के बाहर आ गया, तो सरकार गिर जाएगी। क्योंकि जब झगड़ा होता है, तो तुरंत समाधान निकाल लिया जाता है। फिलहाल राज्यपाल द्वारा नियुक्त होने वाले 12 विधानपरिषद सदस्यों को लेकर झगड़ा जारी है, हालांकि वे इसका समाधान निकाल लेंगे, क्योंकि उन्हें कुर्सी की चिंता है। यह सरकार राज्य के हित की नहीं है। महाजॉब्स पोर्टल के विज्ञापन में फोटो को लेकर झगड़ा हुआ, शिवसेना के मंत्री ने माफी मांग ली और झगड़ा समाप्त। इनके झगड़ों को देखकर लगता नहीं कि जल्द ही सरकार गिरेगी, इसके गिरने में समय लगेगा।

आप महायुति और महाविकास आघाड़ी सरकार की कार्यशैली में क्या फर्क देखते हैं?
हमारे मंत्रिमंडल में शिवसेना के साथ अच्छा तालमेल था। पूरे पांच साल तक कैबिनेट की बैठक में एक बार भी शिवसेना की नाराजगी सामने नहीं आई। एक बार भी भाजपा और शिवसेना के बीच मनमुटाव नहीं हुआ। कैबिनेट में जो भी निर्णय लिए गए, उसका किसी ने विरोध नहीं किया। पिछली सरकार सेंसेटिव और प्रोएक्टिव थी। मांगने के पहले ही मिल जाता था, लेकिन अब जनता अपनी मांग करती है, लेकिन उसे कुछ भी नहीं मिल रहा है। कोरोना काल के दौरान बिजली के बढ़े हुए बिल का मुद्दा एक महीने से चल रहा है, लेकिन सरकार ने कुछ भी निर्णय नहीं लिया, क्योंकि पिछली सरकार में निर्णय लेने की क्षमता थी, जो इस सरकार में नहीं है।

प्रदेश भाजपा के कई नेताओं के राष्ट्रीय कार्यकारिणी में जाने की चर्चा है। इस पर आप क्या कहेंगे?
भाजपा कार्यकर्ताओं में विकास के लिए जिले के बाद राज्य और राज्य के बाद केंद्र में जाने की इच्छा होती है। इसी के तहत पूर्व मंत्री पंकजा मुंडे, विनोद तावड़े और आशीष शेलार की चर्चा चल रही है। बात करें आशीष शेलार की तो उनके कुशल संगठन और अनुभव को देखते हुए भाजपा की केंद्रीय टीम उनका उपयोग करना चाहती है, जिसके लिए केंद्रीय
कमेटी ने शेलार का नाम चुना है। प्रदेश अध्यक्ष के नाते हमने केंद्र से कहा है कि शेलार की जरूरत महाराष्ट्र को भी है, इसलिए कुछ समय वे महाराष्ट्र को भी दें।

आगामी तीन अगस्त से शुरू होने जा रहे महाराष्ट्र विधानमंडल के मानसून सत्र को लेकर भाजपा की क्या रणनीति होगी?
यह सरकार क्या सत्र चलाएगी। अगर सरकार में हिम्मत है तो दस दिन का सत्र चलाकर दिखाएं। हम रोजाना कोरोना काल में हुए भ्रष्टाचार को बाहर निकालेंगे।

यह बात कहां तक सच है कि सरकार मंत्री नहीं, अफसर चला रहे हैं?
मंत्रियों और अधिकारियों के बीच बिलकुल तालमेल नहीं है। अधिकारियों को मालूम है कि मौजूदा सरकार में मंत्रियों का कार्यकाल कभी भी समाप्त हो सकता है। मंत्रियों को जानकारी नहीं है। ऐसे में अफसर ही सरकार चला रहे हैं और कोरोना में उन्हें अच्छा मौका मिला, क्योंकि सारे मंत्री अपने-अपने घरों में छिपे हैं।

राज्य के आर्थिक हालात खराब हैं, इसका जिम्मेदार कौन है?
राज्य की अर्थव्यवस्था बहुत गंभीर है। हालांकि केंद्र सरकार ने राज्य सरकार के कर्ज की सीमा को बढ़ा दिया है। सरकार को उद्योग-धंधों की सेहत सुधारनी होगी, लेकिन सरकार रो रही है कि मेरे पास पैसे नहीं है। एसटी के चार हजार कर्मचारियों को काम पर से निकाल दिया गया। सरकार को एसटी को 500 करोड़ दे देना चाहिए, क्योंकि बेरोजगार लोग क्या करेंगे? पैसा नहीं डालेंगे, तो पैसा कहां से आएगा। हमारी मांग है कि सरकार कर्ज लेकर कोरोना योद्धाओं को वेतन दे। स्वास्थ्यकर्मी और पुलिसकर्मी इस कोरोना काल में अपनी जान हथेली पर रखकर लोगों की जान बचा रहे हैं। इन सभी को बोनस मिलने की बजाय पिछले चार महीने से वेतन नहीं दिया जा रहा है। यह गलत है।

कोरोना काल में जरुरतमंदों के लिए भाजपा ने क्या काम किए?
भाजपा के कार्यकर्ताओं ने दो करोड़ 40 लाख खाने के पैकेट्स बांटे। एक करोड़ लोगों को मास्क तथा 65 हजार लोगों को सेनेटाइजर का वितरण किया। 40 हजार कार्यकर्ताओं ने रक्तदान किया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कोरोना के कारण अन्य राज्यों में जाने वाले प्रवासी मजदूरों को रास्ते के लिए खाना और उन सभी को सही सलामत स्टेशन तक पहुंचाने का काम भाजपा कार्यकर्ताओं ने किया। पैदल चलते मजदूरों के लिए भोजन और स्वास्थ्य को देखते हुए दवाओं की व्यवस्था करना, बड़े पैमाने मरीजों की स्क्रीनिंग करना, पुणे सहित कई स्थानों पर भाजपा ने कोरेंटाइन सेंटर शुरू किए हैं।
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