सूबे की पांच नदियां लाल निशान से ऊपर

उत्तर बिहार में नदियों के पानी में उतार- चढ़ाव के बीच बाढ़-कटाव के संकट से तबाही का दौर जारी है। शनिवार को सीतामढ़ी में एप्रोच पथ तो मधुबनी में पुलिया ध्वस्त हो गई है। मुजफ्फरपुर के अहियापुर थाने में पानी घुस गया। सीतामढ़ी में डूबने से दो की मौत हो गई। गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती का रुख अलग- अलग हिस्सों में कहीं नरम तो कहीं गरम है। मनुषमारा, लखनदेई और अधवारा समूह की नदियां भी खूब तेवर दिखा रहीं हैं। मुजफ्फरपुर में बूढ़ी गंडक के उफानाने से शहर के निचले इलाकों पर पानी का दबाव बढ़ गया है। जीरोमाइल स्थित अहियापुर थाने में भी बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया। नदी का पानी तेजी से बढ़ने के कारण निचले इलाके के मोहल्ले तेजी से खाली हो रहे हैं। लखनदेई और मनुषमारा का पानी औराई और कटरा के बाढ़ प्रभावित इलाकों में फिर तेजी फैल रहा है।
राज्य के आठ जिलों- सीतामढ़ी, शिवहर, सुपौल, किशनगंज, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज और पूर्वी चंपारण के 30 प्रखंडों के 150 ग्राम पंचायतें अभी बाढ़ से प्रभावित हैं। इन पंचायतों की दो लाख 90 हजार आबादी प्रभावित हुई है। आपदा प्रबंधन विभाग के अपर सचिव रामचंद्रुडु ने शनिवार को प्रेस कांफ्रेंस में यह जानकारी दी।उन्होंने कहा कि राज्य के चार जिले सुपौल, दरभंगा, पूर्वी चंपारण और गोपालगंज में 28 सामुदायिक किचेन चलाए जा रहे हैं, जहां पर बाढ़ से प्रभावित 17 हजार लोगों को प्रतिदिन भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। विभिन्न जिलों में पांच राहत शिविर भी लगाया गए हैं, जहां पर दो हजार लोग रह रहे हैं। राज्य में आधा दर्जन नदियां कहीं ना कहीं लाल निशान से ऊपर ही बह रही हैं। उधर गंगा नदी के जलस्तर में शुक्रवार को थोड़ी वृद्धि के बाद पटना में इसका जलस्तर गिरने लगा है। बागमती दरभंगा, सीतामढ़ी और मुजफ्फरपुर में अब भी खतरे के निशान से ऊपर है। कोसी और गंडक का डिस्चार्ज तो अपनी सीमा में आ गया है। कमला जयनगर में नीचे तो झंझारपुर में अब भी ऊपर है। राज्य में कोसी नदी का डिस्चार्ज बराह क्षेत्र में 1.38 लाख घनसेक और बराज पर मात्र 1.45 लाख घनसेक रह गया है।

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