यह असली हिंदुस्तानियत है

शताब्दियों की प्रतीक्षा का अंत उसी दिन हो गया था जब उच्चतम न्यायालय ने अपने ऐतिहासिक फैसले के साथ अयोध्या में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण को हरी झंडी दिखा दी थी, और जिस शांति एवं संयम से पूरे देश ने यहाँ तक कि अल्पसंख्यक समुदाय ने भी इस फैसले का खुले दिल से स्वागत किया, वह अपने आप में एक मिसाल बन गया. ऐसा कोई पहाड़ नहीं टूटा जिसकी विरोधी आशंका व्यक्त कर रहे थे. मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट और निर्माण समिति की औपचारिकताएं केंद्र सरकार ने बहुत पहले ही पूरी कर दी थी, परन्तु कोरोना महामारी के इस काल में जब देश और दुनिया का सारा क्रियाकलाप अवरोधित है तो इसमें में भी कुछ देरी हुई. शनिवार की अपनी बैठक में राम जन्मभूमि न्यास ने शिलान्यास की दो तारीखें तय की और उसे संस्तुति के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय भेज दिया. कारण सबकी यही इच्छा है कि प्रधानमंत्री अयोध्या में बनने जा रहे नए राममंदिर के भूमिपूजन का, बहु प्रतीक्षित निर्माण का श्रीगणेश करें. मिली जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री ने 5 अगस्त को भूमि पूजन करने की रजामंदी दे दी है, नि:संदेह यह अवसर हर सनातन धर्मावलंबी और हर भारतीय के लिए गर्व की बात है. जिस दिन शिलान्यास होकर मंदिर निर्माण की शुरुवात होगी वह हर भारतीय के लिये महोत्सव का दिन होगा. भगवान राम हमारी संस्कृति के वह नायक हैं जिनके आदर्श का अनुपालान कर हर व्यक्ति अपना जीवन शांतिमय, सुखमय और समृद्ध कर सकता है, और उनके पवित्र नाम के जप से, उनके गुणगान से और उनके कथा श्रवण से अपना परलोक भी सुधार सकता है. यह अनायस ही नहीं कि भगवान राम पूरे देश के जन-मानस की हर साँस में समाये हैं, और सब उनका नाम जप कर उनके दिखाये मार्ग पर चल कर अपना जीवन सफल कर है. ऐसे भगवान का मंदिर राम जन्म भूमि पर ना होना बड़े कष्ट की बात थी और इसे साकार करने के लिए रामभक्तों ने शताब्दियों तक संघर्ष किया, अपना खून बहाया, कुर्बानी दी. स्वतंत्रता के बाद के काल से मामला न्यायालय में प्रविष्ट था, सत्र न्यायलय से लेकर उच्चतम न्यायालय तक गया और अंत में न्याय हुआ और दूसरे पक्ष को भी अयोध्या में ही पांच एकड़ जमीन मिल गयी है. यह सुखद बात है कि एक जमाने में विवाद के पैरोकार अल्पसंख्यक समाज के लोग भी आज खुद बड़-चढ़कर मंदिर निर्माण में दिलचस्पी ले रहे है और प्रधानमंत्री के स्वागत को लालायित हैं. यही असली हिंदुस्तानियत हैं. जो पूरी दुनिया को एक परिवार मानता है, जो सभी के साथ भले ही उसका धर्म, रंग, नस्ल और भाषा अलग हो, मिल-जुल कर रहने का सन्देश ही नहीं देता, बल्कि शांति और सामंजस्य से हजारों सालों से रह कर दिखाता भी है. यही आदर्श राम-राज का भी था, जो एक ऐसा आदर्श राज था जहां कोई दींन-दुखी और गरीब नहीं था. सबको अपने जीवनयापन एवं विकास के साधन सहज सुलभ थे. किसी के साथ कोई अत्याचार अन्याय नहीं होता था. तो आइये जब लम्बे या, यों कहें कि सदियों के इंतजार, संघर्ष, बलिदान और कुर्बानी के बाद यह अवसर आया है कि अयोध्या में भगवान राम की जन्म स्थली पर भगवान राम के मंदिर का शिलान्यास होने जा रहा है, और जल्द ही भव्य एवं दिव्य मंदिर बनकर तैयार होगा, और रामलला वहां विराजमान होंगे. हम यानि हर भारतवासी यह संकल्प लें कि वह अपने आचार-विचार और व्यवहार से इस तरह कार्यरत होगा कि देश में राम-राज लाने के जिस लक्ष्य से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार हर संभव काम कर रही है वह जल्द से जल्द साकर हो.

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