गणेशोत्सव में आजीविका कमाने वालों पर संकट

मुंबई
कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर महाराष्ट्र सरकार ने इस साल गणपति उत्सव सादगी से मनाने का आह्वान किया है, लेकिन इस पर्व से जुड़े हुए लोगों की आजीविका पर विपरीत प्रभाव पड़ा है, जो हर साल मुंबई में गणपति उत्सव के दौरान 70 करोड़ रुपए से ज्यादा का कारोबार करते हैं। यहां लगभग 12,000 सार्वजनिक गणेश मंडल हैं।
मुंबई मनपा, सरकार और गणेश मंडल के बीच समन्वय स्थापित करने वाली संस्था बृहन्मुंबई सार्वजनिक गणेशोत्सव समन्वय समिति के अध्यक्ष नरेश दहीबावकर ने कहा कि लोग अपने घरों में हर साल लगभग दो लाख गणेश मूर्तियां स्थापित करते हैं। उन्होंने कहा कि उत्सव के दौरान एक छोटा उद्योग काम करता है, जिसमें फूल बेचने वाले, बिजली कर्मी, मंडप के लिए बांस बेचने वाले, परिवहन सेवाएं देने वाले, कारीगर और बहुत सारे लोग शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि यहां उत्सव के दौरान 70 करोड़ रुपए का कारोबार होता है और सरकार को कर भी मिलता है। उन्होंने कहा कि इस साल उत्सव से जुड़े लोगों की आजीविका पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। महाराष्ट्र में गणेशोत्सव सबसे लोकप्रिय पर्व है। गणेश चतुर्थी के दिन आरंभ होने वाले दस दिवसीय उत्सव के दौरान मुंबई और राज्य के अन्य स्थानों में विभिन्न मंडलों द्वारा स्थापित पंडाल हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं। इस वर्ष 22 अगस्त को गणेश चतुर्थी है। एक शताब्दी से भी अधिक समय से सार्वजनिक पर्व होने के बाद से गणपति उत्सव का दायरा कई गुना बढ़ चुका है।
दहीबावकर ने कहा कि 1896 में प्लेग फैला था, जिसके कारण उस समय भी गणेशोत्सव सादगी से मनाया गया था और लोगों ने अपने घरों में मूर्तियों की बजाय भगवान गणेश के चित्र लगाकर पर्व मनाया था। उन्होंने कहा कि इस साल कोरोना वायरस फैलने के चलते प्रस्ताव दिया गया है कि पर्व को फरवरी 2021 तक के लिए स्थगित कर दिया जाए, लेकिन एक जनवरी 2021 से प्लास्टर ऑफ पेरिस के प्रयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
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