अस्पताल और बीमा कंपनी को मुआवजा देने का निर्देश

ठाणे
ठाणे जिला उपभोक्ता विवाद निपटारा आयोग ने एक बीमा कंपनी, अस्पताल और टीपीए को सेवा में कमी का दोषी माना और एक व्यक्ति को उसके बेटे के उपचार के लिए बीमा दावे के तौर पर करीब 35,000 रुपए देने का निर्देश दिया। आयोग ने हाल में यह आदेश जारी किया। आयोग ने दावा करने के आवेदन की तारीख से नौ प्रतिशत ब्याज के साथ 19,964 रुपए, मुआवजे के तौर पर 10,000 रुपए और दावे पर खर्च के लिए 5,000 रुपए देने का आदेश दिया। ठाणे शहर में कोपरी के निवासी दिलीप असवानी ने आयोग को बताया कि उन्होंने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से अपने परिवार के सदस्यों के लिए स्वास्थ बीमा कराया था। उन्होंने अपनी शिकायत में कहा कि अक्टूबर 2015 में उनका बेटा थ्रोमबोस्ड हेमोराइड की सर्जरी के लिए स्थानीय वेदांत मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती हुआ, लेकिन कैशलेस सुविधा से इंकार किए जाने, अनुपयुक्त जांच तथा अन्य कारणों से कुछ समय बाद उसे छुट्टी दे दी गई। इस कारण से उसे दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां पर उसका उपचार हुआ । इस पर कुल 98,900 रुपए खर्च हुए। शिकायत में उन्होंने समस्त राशि भुगतान किए जाने का दावा किया, लेकिन 19,664 रुपए की कटौती के बाद दावे को मंजूरी दी गई। इसके बाद उन्होंने वेदांत मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल, नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और एम डी इंडिया हेल्थकेयर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ आयोग का रूख किया। आयोग ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और बीमा कंपनी, अस्पताल और टीपीए को सेवा में कमी का दोषी ठहराया और मुआवजे का भुगतान करने को कहा।
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