यह कैसी हिमाकत है

मंगलवार देर रात बेंगलुरु में जिस हिंसा का तांडव नृत्य हुआ उसकी तह में जाना जरूरी है. कर्नाटक सरकार को इस मामले की गंभीर जांच करनी चाहिए. कारण संयुक्त राष्ट्र संघ और अन्य कई माध्यमों से हमें लगातार चेताया जा रहा है कि दुनिया में सक्रिय जेहादी तत्व मसलन आईयसआईयस आदि हमारी धरती के दो राज्यों कर्नाटक और केरल में अपना पैर पसारने का प्रयास कर रहे है. यही नहीं पाकिस्तान के साथ-साथ अब तुर्की भी हमारी अल्पसंख्यक आबादी के लोगों को भड़काने के लिए दिमाग़ और पैसा लगा रहा है. बेंगलुरु में जो कुछ हुआ वह कितना डरावना है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दंगाइयों ने अपना निशाना बनाते समय यह भी भान नहीं रखा की वे पुलिस् थानेऔर विधायक निवास पर हमला कर रहे है. जिस तरह दंगाइयों ने कारों और मोटर सायकिलों को जला कर ख़ाक किया है, उससे यही लगता है कि उन्हें किसी का खौफ नहीं है. इस पूरी घटना में तीन लोगों को अपनी जान गवानी पडी और लगभग 60 पुलिसकर्मी घायल हुए है. यह सब किसी दूर-दराज के इलाके में नहीं हुआ बल्कि देश के एक बड़े महानगर में हुआ है. इसमे कोई दो राय नहीं की जिस तरह की भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल हमारे देश के कुछ अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं द्वारा पिछले लम्बे समय से और विशेषकर राम जन्म भूमि मंदिर निर्माण के भूमिपूजन के बाद से किया जा रहा है. यह सर्वथा अनुचित और अवांछनीय है, इसका कोई ना कोई इलाज ढूढ़ना होगा, परंतु सबसे पहले जरूरी है कि कर्नाटक के कांग्रेसी विधायक के रिश्तेदार की उस पोस्ट की सत्यता की जांच की जाय, जिस पर पैगम्बर साहब पर की गयी टिप्पणी को लेकर यह बवाल किया गया. यदि उसमें दम है तो उस पर भी त्वरित करवाई हो. परन्तु उसे लेकर दंगा करने वालों पर भी कड़ी से कड़ी करवाई होनी चाहिए. कारण यदि कोई आपत्तिजनक बात हुई भी थी, तो उसका समाधान करने के कई संवैधानिक तरीके और मार्ग है. जिसके माध्यम से आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले को सबक सिखाया जा सकता था. उसके लिए पुलिस थाने पर हमला, विधायक के घर पर हमला, उत्तेजक और विभाजक तथा साम्प्रादायिक विद्वेश बढ़ने वाले नारे और सम्पत्ति एवं वाहनो की तोड़फोड़ हर दृष्टि से निंदनीय है. इस मामले में लिप्त लोग सख्त करवाई के पात्र है. वह चाहे दिल्ली हो या लखनऊ और अब बेंगलुरु में पी एफ आई नामक मुस्लिम संगठन की संलिप्तता की बात काफी तेजी से उभरी है. शाहीन बाग़ आन्दोलन के दौरान और सीएए हिंसा एवं दंगे के समय भी इसका नाम उछला था. इस पर कुछ करवाई भी हुई थी. अब बेंगलुरु मे जिस संगठन द्वारा हिंसा किया जाना बताया जा रहा है उस सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी को इसी कट्टर पंथी संगठन का राजनैतिक चेहरा बताया जा रहा है. ऐसे संदिग्ध संगठन की हर कोण से जांच और कुछ भी उलटा-सीधा पाया जाय तो उस पर सख्त करवाई वक्त की मांग है. हो सकता है कि उत्तर में इन पर कारवाई और कड़ी नजर के मद्देनजर ये अब दक्षिण के राज्यों में अपना पैर पसार रहे है. तुमने कुछ कहा और हमें पसंद नहीं है इसलिए हम आप पर हमला करेगे यह कबीलाई सिद्धांत 21वी सदी में कैसे चलेगा? आश्चर्य है कि इनका चैंपियन बनाने वाले मौलानाओं और नेताओं द्वारा इसकी निंदा तक भी नहीं की गयी. यह दर्शाता है कि ऐसी प्रवृति पर अभी, जबकि वह उग रही है, उस पर करारा कुठाराघात हो. दंगाई चाहे जिस जाति अथवा धर्म का हो उसे बक्शा नहीं जाना चाहिए. वह अपराधी है, देश विरोधी है. उसके सूत्रधार व समर्थक सबको कटघरे में खड़ा किया जाना चाहिये. देश और देश की शांति एवं उसकी सामाजिक सद्भावना पर हमला करने वाला और कानून व्यवस्था का सम्मान न करनेवाला देश और समाज का दुश्मन है और उसके साथ वैसा ही व्यवहार होना चाहिए.

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