कोरोना ने किया दही-हांडी उत्सव का रंग फीका

Dahi Handi
मुंबई
कोविड-9 महामारी का असर मुंबई और महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में दही-हांडी उत्सव पर भी देखने को मिला और इसकी वजह से त्योहार फीका रहा। दही-हांडी त्योहार के दिन सुबह से सड़कों, सोसायटियों में गोविंदा टोली की धूम मची रहती थी। हर तरफ लाऊड स्पीकर का शोर और माखन चोर की धुन सुनाई देती थी, ट्रकों पर बैठकर हजारों की संख्या में गोविंदा मटकी फोड़ने के लिए सड़कों पर निकल पड़ते थे, लेकिन इस बार कोरोना संकट के कारण दही-हांडी उत्सव रद्द कर दिया गया।
प्रगति गोविंदा पथक, जो पिछले 48 साल से दही-हांडी उत्सव मनाते थे, इस बार प्लाज्मा दान कर त्योहार मनाया। बाल गोपाल मंडल के सदस्य सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए एक जगह जमा हुए और गदा पूजन कर बाहर नहीं निकलने का निर्णय लिया। विलेपार्ले क्लब महिला दही-हांडी गोविंदा पथक की अध्यक्ष गीता झगडे ने कहा कि हम 20 साल से गोविंदा मना रहे हैं। इस वर्ष सात पिरामिड नहीं बना सके, लेकिन अगले साल फिर उसी जोश से सात स्तर का पिरामिड बनाने का रिकॉर्ड बनाएंगे।
अनेक वर्षों से महाराष्ट्र में यह उत्सव काफी धूमधाम से मनाया जाता रहा है, खासतौर पर मुंबई और पड़ोसी क्षेत्र ठाणे में इस अवसर पर काफी जश्न का माहौल रहता था। दही-हांडी आयोजनों में धार्मिक संस्थाएं, नेता और रंगे-बिरंगे कपड़े पहने गोविंदा के रूप में युवाओं की टोली हिस्सा लेती थी। कई सामाजिक समूह भी दही-हांडी कार्यक्रम आयोजित कराते थे। सफलतापूर्वक मटकी फोड़ने वाले समूह को नकद राशि भी दी जाती थी। इस हांडी में दही और मखन रखा जाता है और यह रस्सी की मदद से काफी ऊंचाई पर बंधी होती है, लेकिन इस साल सिर्फ सांकेतिक तौर पर ही दही-हांडी मटकी फोड़ी गई। सामाजिक दूरी बनाते हुए मास्क पहनकर सांकेतिक तौर पर कार्यक्रम को पूरा किया गया। मुंबई के घाटकोपर क्षेत्र से भाजपा विधायक राम कदम ने कहा कि सामान्य स्थिति में उनके मंडल के दही-हांडी उत्सव में पांच-छह लाख लोग आते हैं। कदम ने कहा कि आम समय में दही-हांडी उत्सव का हमारा आयोजन भारत में सबसे बड़े स्तर पर होता है, लेकिन इस साल कोविड-19 संकट के मद्देनजर इसे हमने सादे तरीके से सामाजिक दूरी बनाते हुए मनाया। मानव पिरामिड नहीं बनाया गया। बस सांकेतिक तरह से त्योहार मनाने के लिए एक बच्चे ने टेबल पर चढ़कर ऊपर टंगी हांडी को फोड़ा। उन्होंने कहा कि इस साल हमने चीनी उत्पादों का बहिष्कार करने और आत्मनिर्भर भारत बनाने का संदेश दिया है। दही-हांडी उत्सव समन्वय समिति के प्रमुख बाला पडेलकर ने कहा कि इस साल लोगों का उत्साह पहले जैसा नहीं है और विभिन्न मंडलों के कई सदस्य दही-हांडी फोड़ने के लिए इस बार यात्रा करने पर सहमत नहीं हुए। इस मंडल में 950 से अधिक समूह हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने बिना जश्न और मानव पिरामिड बनाए बगैर अपने क्षेत्र में पूजा की। वहीं शहर में ऊंची-ऊंची मानव पिरामिड श्रृंखला बनाने के लिए मशहूर जय जवान गोविंदा पाठक (दस्ते) के कोच संदीप धावले ने बताया कि सामाजिक दूरी अभी की जरूरत है और सादे तरीके से त्योहार मनाना सबके हित में है। उन्होंने कहा कि उनके मंडल ने बुधवार को इस त्योहार के मौके पर सामाजिक दूरी के नियम का पालन करते हुए प्लास्टिक मुक्त मुंबई और स्वच्छ पर्यावरण की पहल की।
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