महागठबंधन को मांझी ने मझधार में छोड़ा

पटना 
बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले विपक्षी खेमे को तगड़ा झटका लगा है। हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) ने महागठबंधन से नाता तोड़ लिया है। हम अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने आरोप लगाया है कि आरजेडी नेता तेजस्वी यादव जिद्दी हैं और किसी की कोई बात सुनते ही नहीं हैं। ऐसे में उनके साथ रहकर काम करना मुश्किल है। जीतन राम मांझी का महागठबंधन से अलग होना बड़ी क्षति मानी जा रही है। मांझी बिहार में महादलित समाज के बड़े नेता माने जाते हैं। आइए समझने की कोशिश करते हैं कि वोट बैंक के हिसाब से जीतन राम मांझी महागठबंधन को कितना नुकसान पहुंचा सकते हैं। 
 बिहार में अनुसूचित जाति के लिए बिहार विधानसभा में कुल 38 सीटें आरक्षित हैं। 2015 में आरजेडी ने सबसे ज्यादा 14 दलित सीटों पर जीत दर्ज की थी। जबकि, जेडीयू को 10, कांग्रेस को 5, भाजपा को 5 और बाकी चार सीटें अन्य को मिली थी। इसमें 13 सीटें रविदास समुदाय के नेता जीते थे, जबकि 11 पर पासवान समुदाय से आने वाले नेताओं ने कब्जा जमाया था। 
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