बड़े शहरों में लौटने लगे कोरोना से बेखौफ मजदूर

पटना 
कोविड-19 और लॉकडाउन के कारण बिहार के गांवों में लौटनेवाले प्रवासी मजदूरों को पेट की आग ने फिर से शहर जाने को मजबूर कर दिया है। इस कारण बिहार से नई दिल्ली, मुंबई, पुणे, हैदराबाद, बेंगलुरु, चेन्नई आदि शहरों को जाने वाली तमाम ट्रेनें हाउसफुल चल रहीं हैं। अगस्त-सितंबर में किसी भी स्पेशल ट्रेन में सीटें खाली नहीं हैं। रेल अधिकारियों की मानें तो कोरोना संक्रमण के कारण शहरों से गांव लौटने वालों के लिए रेलवे की ओर से 230 ट्रेनों का परिचालन शुरू किया गया था। इन ट्रेनों में आने वालों की भीड़ तो थी, लेकिन बिहार से लौटने वाले बहुत कम थे। अधिकांश ट्रेनों में 30 से 70 फीसद तक सीटें खाली रह रही थीं। अब ट्रेनें फुल होकर जा रहीं हैं। अगस्त की शुरुआत से ही बिहार होकर चलने वाली या बिहार से खुलने वाली अधिकांश ट्रेनें हाउसफुल हो गईं। इन ट्रेनों में सभी श्रेणियों में लौटने वाले मजदूरों की भीड़ रह रही है। पहले जो जनरल श्रेणी में यात्रा करते थे, आज एसी 3 या 2 में जा रहे हैं। कंपनी वाले ही उन्हें टिकट भेज रहे हैं। 

आईडी और टिकट पर नाम-पता अलग-अलग 
ट्रेनों में ड्यूटी करने वाले टिकट निरीक्षकों की मानें तो अधिकांश मजदूरों के पहचानपत्र पर नाम पता कुछ और होता है तो टिकट पर कुछ और। टिकट पर उम्र 40 साल तो पहचान पत्र पर 22 वर्ष। पूछने पर बताते हैं कि कंपनी वालों ने टिकट भेजा है। ऐसे लोगों से रेलवे की ओर से जुर्माना भी वसूला जा रहा है। 

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