कोरोना से बचना प्राथमिकता

देश में कोरोना को दस्तक दिए लंबा काल बीत चुका है. हमारे यहाँ ठीक होने का प्रतिशत काफी अच्छा है. मृत्यु दर भी काफी कम है लेकिन अभी भी इसका बेतहाशा प्रसार जारी है. इसलिए इस दिशा में जिस जागरूकता के साथ देश का जनमानस अपना व्यवहार कर रहा है उसी तरह जारी रहने की जरूरत है, कारण ज़रा सी भी लापरवाही व्यक्ति को इसकी चपेट में ला सकती है. जो एक बड़े तबके की पीड़ा और परेशानी का कारण बनता है. हमारा देश विभिन्न जाति-धर्म मानने वालों का एक अनूठा संगम स्थल है. रोज कोई न कोई त्यौहार रहता है. हर व्यक्ति की इच्छा होती है कि हम अपना त्योहार धूमधाम से मनाएं. कोरोना ने उसका पूरा तौर-तरीका ही बदलने को हमे बाध्य किया है. इसके पहले भी हमने कृष्ण जन्माष्टमी और बकरीद जैसे त्योहारों पर सरकार द्वारा जारी निर्देशों और बन्धनों का जिस संजीदगी से अनुपालन किया वह काबिले तारीफ है. हमसे वैसी ही संजीदगी की उम्मीद आगामी त्योहारों में भी की जाती है. यह अपेक्षा इस देश के सभी धर्म और जाति के मानने वाले लोगों से है. सबको यह भान होना चाहिए कि कोई भी आपदा या महामारी यह देख कर नहीं आती कि व्यक्ति किस धर्म, जाति या मजहब का है. वह सबको निशाना बनाती है, इसलिए हम इबादत करें, खुशियाँ मनाये लेकिन वह करते समय हम हमेशा उस सीमा रेखा के अन्दर रहे, उन मर्यादाओं और निर्देशों का अनुपालन सख्ती से करें जो हमें और हमारे अपनों को कोरोना की चपेट में आने से बचा सकती हैं. जनता ने बड़े सब्र से कोरोना की लड़ाई में देश की राज्य सरकारों और केंद्र सरकार का साथ दिया है. और अब लड़ाई धीरे धीरे अंतिम चरण पर पहुंच रही है, तो अब कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए. कोई भी लापरवाही हमारे केंद्र और राज्य सरकारों की अब तक के प्रयासों, चिकित्सक, सफाई कर्मी और सुरक्षा कर्मी जैसे कोरोना योद्धाओं के सराहनीय कार्यों को निरर्थक कर सकता है. साथ ही उत्सव व अर्चना के इन क्षणों में हम उन कोरोना योद्धाओं को याद करना कदापि ना भूलें, जिन्होंने इस लड़ाई में अपनी आहुति दे दी. इसके बाद भी यह वर्ग दिन-रात काम पर लगा है. हम और कुछ नहीं कर सकते तो उनकी सराहना करने में कंजूसी नहीं करनी चाहिए. कुछ जगहों पर इनके साथ दुर्व्योहार की भी बातें सामने आती है. प्रशासन ऐसे लोगों पर कड़ी कारवाई भी कर रहा है. ऐसे लोगों की जितना संभव हो कड़ी निंदा होनी चाहिए. ऐसी कोई आपदा नहीं, जिसका सामना मानव एकजुटता और जागरूकता से नहीं कर सकता. हम सब जागरूकता और एकजुटता का परिचय देते हुए इससे लड़ने का जो तप पिछले छह महीने से कर रहे है, वह तब तक जारी रखना है जब तक वैक्सीन नहीं आ जाती.
देश और दुनिया में शोधार्थी इस दिशा में प्रयत्न की पराकाष्ठा कर रहे हैं, जिसके अच्छे परिणाम भी आ रहे है. कई वैक्सीन आ चुकी है और कई आने की कगार पर हैं. तब तक हमें उसी धैर्य का परिचय देना होगा जो आज तक देश के अधिकांश नागरिक देते आये है. आज हम यह कह सकते है कि इसका ही परिणाम है कि देश की स्थिति कोरोना को लेकर दुनिया की तुलना में चाहे व मरीजों के ठीक होने का आंकडा हो या मृत्यु दर हो, काफी उत्साहवर्धक है. हमें इस जज्बे व लड़ाई की इस इच्छाशक्ति को तब तक बरकरार रखना है जब तक इसका कोई उचित चिकत्सीय तोड़ समाने नहीं आ जाता. हम हर कार्य करें, हर उत्सव मनाएं, परन्तु कोरोना से लड़ने को सर्वोच्च प्राथमिकता दें. हर कदम पर वांछित सवाधानी बरतें और स्वस्थ रहें. सारे भेदभाव भूलकर देश के जिम्मेदार नागरिक की तरह इससे दो-दो हाथ करने में कोई भी बाधा न आने दें.

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