आत्मनिर्भर भारत बनाने का संकल्प ले

आज स्वतंत्रता की 73 वीं वर्षगांठ मना रहा है इस सात दशक की अवधि में हमने कई मील के पत्थर तय किये. जिस देश में माचिस नहीं बनती थी आज कोई ऐसा उत्पाद नहीं है जो यहाँ न बनता हो. हमने धरती से लेकर अंतरिक्ष तक अपनी जबर्दस्त उपस्थिति दर्ज करवाई है. कोरोना काल के पहले हम जिस तरह बढ़ रहे थे, हमारे दुश्मनों के लिए द्वेष और दोस्तों के आनंद का कारक था. यही नहीं कोरोना जैसी आपदा का, जिसने देश और दुनिया का पूरा कारोबार ठप कर दिया है, हम जिस दृढ़ता से सामना कर रहे हैं, उसकी दुनिया दाद दे रही है. यह स्वतंत्रता काल से लेकर आज तक हुए कार्यों का प्रतिफल है, कि आज हमारी कूटनीतिक कुशलता का, आर्थिक क्षमता और संभावना का, सामरिक ताकत का एहसास दुनिया को हो रहा है. इसमें कोई दो राय नहीं कि इस भारत को जिसको देखने का आज दुनिया का नजरिया बदला है,उसे रूप देने में देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार कायोगदान ऐतिहासिक और अभूतपूर्व है. इनके नेतृत्व मेंजिस तरह के साहसी निर्णय लिए गए उसकी धमक ने देशके सोचने का नजरिया बदल दिया है. एक ऐसा विश्वासदेश में आया कि हम असंभव को भी संभव कर सकतेहै. कोरोना का व्यवधान नहीं आया होता तो शायद अबतक हमने आर्थिक क्षेत्र में और कीर्तिमान स्थापित कियेहोते. इसी बीच चीन ने फिर हमारी सीमा पर दखल अन्दाजीकी हिमाकत की, और पाक को उचकाया व नेपाल कोभी बरगलाया. कोरोना के माहौल में जिस दृढ़ता, हिम्मतऔर बहादुरी के साथ हमने इनका मुकाबला किया औरकर रहे है, इन तीनो के पसीने छूट रहे है. आज चीन दोस्तीकी बात कर रहा है और पाकिस्तान अमेरिका से गिड़गिड़ारहा है कि हमारे भारत के साथ रिश्ते सामान्य करने मेंमदद करे. वहीं नेपाल भी बातचीत का मार्ग ढूढ़ रहा है.यह कोई छोटी-मोटी बात नहीं है, आज पूरी दुनिया तुर्की,पाक और मलेशिया जैसे कुछ चंद देशों को छोड़ हमारेसाथ है. यह तो हुई सामरिक और कूटनीतिक स्तर पर ध्वजफहराने की बात. आर्थिक मोर्चे पर भी प्रधानमंत्री आपदाकाल को अवसर में बदलने के लिए संकल्प ले चुकेहै. पूरे देश ने और विशेषकर देश के उद्यमियों ने इसकाअभिनंदन किया है. यह अभियान है देश को आत्मनिर्भरबनाने का. देश की अर्थव्यवस्था को निर्यातोन्मुखी बनानेका और यह असंभव नहीं है. कोरोना के इस काल मेंजब दुनिया से समान आने की गति काफी धीमी हुई है, तो स्थानीय उत्पादों ने ही हमारी नाव पार लगाई है.आत्मनिर्भर बनने की इस नीति में अपार संभावनाएं है,यह देश का चेहरा-मोहरा बदल सकता है, यह रोजगारबढ़ा सकता है, निर्यात बढ़ा सकता है और जो पैसा हमआयात में खर्च कर रहे है वह देश में रहेगा. निर्यात से देशके राजस्व में वृद्धि होगी जिससे देश का और तेज गतिसे विकास होगा. आज भी जो विसंगतियां हमारे समाजमें है तिमिर-तिरोहित होंगी. तो आइये स्वतंत्रता दिवस कीइस मंगल बेला पर संकल्प लें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी केदेश के आत्मनिर्भर बनाने के अभियान में एकजुटता केसाथ जुड़ने का, हर परिस्थिति में देश के ही उत्पादों काउपयोग करने का तथा चीन जैसे दुश्मनों के उत्पादों काबहिष्कार करने का, तभी बात बनेगी और देश विकसितराष्ट्रों की प्रथम पंक्ति में खड़ा होगा.

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