पेट में मची आग को दूर करे, ठंडा दूध व तुलसी के पत्ते


Tulasi Milk
ठंडा दूध : दूध में कैल्शियम की उच्च मात्रा होती है, जो उत्पादित एसिड को अवशोषित करके एसिड बिल्ड-अप को रोकने मे मदद करता है। इसके अलावा अगर दूध ठंडा है, तो यकीन मानिए यह आपको उस जलन से तुरंत राहत प्रदान करता है जो किसी व्यक्ति को एसिड रिफलक्स के दौरान महसूस होती है। हां इस बात का ध्यान जरूर रखें कि इसमें चीनी मिलाने से बचें। 

तुलसी : सबसे सुरक्षित आयुर्वेदिक उत्पादों में से एक तुलसी अधिक बलगन का उत्पादन करने के लिए पेट को उत्तेजित करने में मदद करता है। इसमें एन्टीसुलर गुण होते हैं और गैस्ट्रिक एसिड के प्रभाव को कम करता है। एसिडिटी के दौरान महसूस होने वाली परेशानी को दूर करने का एक सबसे आसान तरीका है कि आप तुरंत राहत पाने के लिए 4-6 तुलसी के पत्ते चबा जाएं। 

सौंफ के बीज : कई लोग ताजा उत्पादों के आधार घटक के रूप में सौंफ का प्रयोग कर सकते हैं। यह छोटे-छोटे बीज आपके पेट को ठंडा करने में मदद करता है। हर भोजन के बाद सौंफ चबाएं क्योंकि इसके कई गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल फायदे होते हैं। दिन में एक बार और कुछ दिनों तक आप सौंफ की चाय भी पी सकते हैं क्योंकि यह आपके पाचन तंत्र को स्वस्थ रखती है। 

छाछ : गर्मी के इस झुलसा देने वाले मौसम में सबसे अच्छे पेय में से एक है, एक गिलास ठंडा छाछ। आयुर्वेद के अनु सार छाछ को सात्विक भोजन माना जाता है और इसके पोषक तत्व पेट पर सुखदायक प्रभाव के लिए जाने जाते हैं। अगर आप इसे वैसे ही पीना पसंद नहीं करते हैं, तो काली मिर्च, नमक की एक चुटकी, एक चुटकी हींग और कुछ ताजा कटा हुआ हरा धनिया डालकर देखें। 

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