हकीकत को नजरअंदाज न करें नेता

चीनी कठपुतली और आतंक का मक्का पाकिस्तान जिसने अपना स्वत्व पूरी तरह चीन के पास गिरवी रख दिया है जो हमारे मोदी युग के आक्रामक प्रतिकार से भयाक्रांत है फिर भी अपने काले कारनामे बंद नहीं कर रहा है. वह अब भी हमारे खिलाफ कुत्सित योजनाओं को लागू करने और षडयंत्र रचने में व्यस्त है. जम्मू-कश्मीर में हमारी सेना ने आतंकवाद की कमर तोड़ दी है. रोज आतंकी मारे जा रहे है. सीमा पर से घुसपैठ कराने की भी पाक की कोशिश हमारे सुरक्षा बलों की मुस्तैदी व सख्त नजर के चलते नाकाम है. तो अब वह सीमा पर सुरंग खोदने में लगा है. यही नहीं वह जम्मू-कश्मीर से लेकर पंजाब, गुजरात और राजस्थान के उसके सीमावर्ती इलाकों में भी घुसपैठ कराने की जुगत में लगा है. जिसे हमारे जाबांज और सतत चौकस बीएसएफ़ जवानों ने नाकाम किया है और ऐसी चेष्टा करने वाले भाड़े के टट्टूओं को जहन्नुम रशीद किया है. यही नहीं पाक हर जगह चीन के प्रवक्ता की तरह बोल रहा है. जिसका कड़ा प्रतिकार भी उसे मिल रहा है. लम्बे समय तक छद्म युद्ध से हमे लहूलुहान करने वाला पाक अब तक के इतिहास में पहली बार छेंका हुआ पा रहा है. इसके पहले हमसे युद्ध में बार-बार पिटने के बाद भी उसने सबक नहीं लिया. वह आतंकवाद का सहारा लेकर निर्दोषों को शिकार बनाता रहा है. सर्जिकिल स्ट्राइक और आतंकवादियों का घाटी में सफाए तथा हमारी स्पष्ट चेतावनियों से उसे यह साफ़ सन्देश गया है कि अब कोई भी कुचेष्टा उसके द्वारा हुई तो उसका परिणाम उसके लिए बहुत भयंकर होगा. इसके बावजूद भी उसकी कुचेष्टा बंद नहीं हो रही है. मतलब साफ़ है कि अभी उस पर और सख्त नजर रखने की जरूरत है. साथ ही ऐसे आंतरिक तत्वों पर भी कड़ी नजर रखने की जरूरत है, जो धन या और किसी लोभ में आकर अभी भी पाक की काली करतूतों में सहभागी हो जाते है. जम्मू-कश्मीर में भी राजनैतिक हलचल शुरू है, नेताओं की नजरबंदी खत्म हो गयी है, वे राजनीतिक रूप से ऐसा कोई बयान न दें जिसे पाकिस्तान को कुप्रचार का मौक़ा मिले. कश्मीर में लम्बे समय तक सत्ता का सुख भोग चुके इन दलों विशेषकर एनसी, पीडीपी और कांग्रेस के नेताओं ने अनुच्छेद 370 की आड़ में काफी माल काटा है. ये सब के सब आतंकवाद और अलगाववाद का सामना करने में नकारा साबित हुए थे. इन दलों पर तो उनको संरक्षण देने और उनसे साठ-गाँठ रखने के भी आरोप लगे थे. स्वाभाविक है इन्हें अनुच्छेद 370 और 35 ए का हटना रास नहीं आ रहा है. इस तरह की झलक इनके बयानों में मिल रही है. इसलिए इन्हें यह भी समझाया जाना जरूरी है कि गड़े मुर्दे उखाड़ने से कोई रस नहीं मिलने वाला. ऐसा कर आप पाक के हमारे विरोधी प्रोपेगंडा को बढ़ावा ही देंगे. बाद में भले ही सफाई देतें फिरें, जैसा कि छह पार्टियों के सामूहिक वक्तव्य और उसके बाद पाक की प्रतिक्रिया के बाद फारुक अब्दुल्ला की सफाई से दिख रहा है. 
इसलिए पाक पर सतत व सख्त दृष्टि वक्त की मांग है. साथ ही देश की जम्मू-कश्मीर के इन नेताओं पर भी कड़ी नजर रखने की जरूरत है, जो लम्बे समय तक परिवारवाद और भ्रष्टाचार की जो गंगोत्री बहाते आये है और उसी में फिर गोता लगाना चाहते है. भले ही उसका देश का शत-प्रतिशत जनमानस और जम्मू-काश्मीर का आवाम विरोध करता हो. कारण वह भी अपने राज्य के इन नेताओं की असलियत से बखूबी वाकिब हो चुकी है. इनका यह रवैया राज्य और देश की सेहत के लिए सही नहीं है. उनको अपने अतीत का राजनीतिक रवैया बदलना होगा और राज्य के मौजूदा स्वरुप व हकीकत को स्वीकारते हुए अपनी राजनीति में वैसी तब्दीलियां करनी पड़ेगी, जैसा देश और उसकी आवाम चाहती है, नहीं तो जनता उन्हें ख़ारिज कर देगी. 

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