क्या पैरों में दर्द की शिकायत करता है आपका बच्चा?

छोटे बच्चे, जिनकी उम्र तीन से पांच साल के बीच होती है, वो अक्सर अपने मम्मी-पापा से पैरों में दर्द की शिकायत करते हैं। वो माता-पिता इस चीज को अच्छे से समझ सकते हैं, जिसके बच्चे सोते समय पैरों में दर्द के कारण रोते हैं या अचानक से रात में उठकर बैठ जाते हैं। दरअसल ये दर्द उन्हें दिन भर भागते दौड़ते रहने के कारण और थकावट की वजह से नहीं होता है, बल्कि इसके पीछे कुछ अन्य कारण भी है। ये मांसपेशियों में ऐंठन, पैरों और बाहों में दर्द उनके बढ़ने का लक्षण हो सकता है। 

 क्या है बच्चों में ग्रोइंग पेन 
ग्रोइंग पेन मांसपेशियों का वो दर्द है, जो कुछ प्रीस्कूलर और प्रीटीन्स दोनों तरह के बच्चे अपने पैरों में महसूस करते हैं। ये दर्द आमतौर पर दोपहर या शाम को होता है। लेकिन इससे आपका बच्चा रात के बीच में जाग सकता है। ये दर्द आमतौर पर बचपन में शुरू होते हैं, लगभग 3 या 4 साल की उम्र में और फिर जब वे 8-12 वर्ष की आयु के बीच होते हैं, तब भी उन्हें ये दोबारा हो सकता है। 

ग्रोइंग पेन के क्या कारण है? 
ग्रोइंग पेन के नाम पर, इस बात का कोई सबूत नहीं है कि यह स्थिति एक बच्चे के विकास के साथ जुड़ी है। वास्तव में, इसे लेकर कई तरह के शोध किए गए हैं, जिससे ये मालूम हुआ कि ये बच्चों के बढ़ने के लक्षणों से जुड़ा हुआ है। बाल रोग विशेषज्ञों की राय है कि हड्डी के विकास के कारण दर्द होता है। साथ ही इस बात की संभावना भी है कि बच्चे लगातार खेलने, दौड़ने, कूदने और अन्य गतिविधियों के कारण अपनी मांसपेशियों के अत्यधिक उपयोग से चलते भी इस दर्द का अनुभव करते हैं। 

ग्रोइंग पेन के लक्षण? 
हर बच्चा इस दर्द के बढ़ने का अलग-अलग अनुभव करता है। जबकि कुछ लोग अत्यधिक दर्द से गुजरते हैं, अन्य लोग इसे हल्के रूप में अनुभव करते हैं। वास्तव में, कुछ बच्चों को यह हर दिन भी नहीं होता है। 
 ये दर्द आम तौर पर जांघों, कुल्हों के सामने और घुटनों के पीछे के क्षेत्र में होते हैं। 
 ये दर्द आमतौर पर घुटने के जोड़ को प्रभावित नहीं करता है पर कभी-कभार दर्द हो सकता है। 
 हालांकि, अगर आपको इस जोड़ में कोई असामान्यता दिखती है, जैसे कि लालिमा या सूजन या हमेशा दर्द तो ये गठिया का संकेत हो सकता है। 

   कुछ बच्चों को पैरों के साथ-साथ उनकी दोनों बाहों में बढ़ते दर्द का अनुभव भी हो सकता है। 
  सिरदर्द और पेट में दर्द कुछ मामलों में बढ़ते दर्द के गंभीर संकेत भी हो सकते हैं। 
तो प्रश्न ये उठता है कि क्या माता-पिता को इसे लेकर परेशान होना चाहिए? तो इसका जवाब है हां भी और नहीं भी। आम तौर पर, यह एक हानिरहित स्थिति है जो बच्चों में अपने आप ठीक हो जाती है। लेकिन बढ़ते दर्द के लक्षण कई गंभीर अंतर्निहित स्वास्थ्य स्थितियों जैसे गठिया, पैरों से जुड़ा सिंड्रोम, जोड़ों के मूवमेंट में परेशानी, विटामिन डी की कमी के कारण भी हो सकता है। इसलिए बच्चा अगर लगातार इस बात की शिकायत कर रहा हो, तो उसे एक बार डॉक्टर से जरूर दिखा लें। 

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