नदियों में बढ़ते जलस्तर से बाढ़ का खतरा!

लखनऊ
प्रदेश की नदियों के घटते-बढ़ते जलस्तर के बीच सैकड़ों गांव बाढ़ की चपेट में हैं। गंगा यमुना के बढ़ते जल से कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बनने लगे हैं। दो दिन पहले बांधों को संतृप्त कर चुकी बेतवा नदी में एक बार फिर उफान आ गया है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार एक सप्ताह तक धूप-छांव के बीच रोज बारिश के आसार है।
प्रदेश के तराई वाले जिलों में बारिश के बीच नदियां खतरे के निशान से ऊपर हैं। बहराइच में एल्गिन ब्रिज पर घाघरा खतरे के निशान से 68 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। सीतापुर में घाघरा व शारदा नदी का जलस्तर स्थिर रहा। हालांकि रेउसा, रामपुर मथुरा व बेहटा क्षेत्र के 70 गांवों में बाढ़ का पानी कुछ घटा है। लखीमपुर के पलिया कलां में भी लाल निशान से 40 सेंमी. ऊपर बह रही शारदा का जलस्तर घट रहा है। अंबेडकरनगर में घाघरा नदी के जलस्तर में कमी तो है लेकिन कटान से तटवर्ती इलाकों के बाशिंदे चिंतित हैं। यहां घाघरा लाल निशान से 76 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। टांडा और आलापुर क्षेत्र में बाढ़ का पानी मुसीबत बना है। मार्गों और आबादी के इलाकों में जलभराव है।
गढ़मुक्तेश्वर से लेकर बलिया तक गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। तटवर्ती गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा हंै। फतेहपुर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 64 सेंटीमीटर दूर है। फर्रुखाबाद में गंगा चेतावनी बदु के 30 सेंटीमीटर ऊपर है। नरौरा बांध से शुक्रवार को 175984 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। इससे उन्नाव में गंगा जलस्तर चेतावनी बदु पार कर 112.110 मीटर पर पहुंच गया। दर्जनों गंगा का पानी घुसने से खेत लबालब हो गए हैं। हरदोई में गंगा खतरे के निशान से 30 सेंमी. ऊपर है। उधर रामगंगा के जलस्तर में 15 सेंटीमीटर की कमी दर्ज गई।
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