इजरायल से अवाक्स खरीदेगा भारत

Awax Aircraft
नई दिल्ली 
लद्दाख में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के साथ जारी गतिरोध के बीच नरेंद्र मोदी सरकार दो फाल्कन हवाई चेतावनी और नियंत्रण प्रणाली (अवाक्स) के अधिग्रहण को अगले सप्ताह की शुरुआत में पूरा करने के लिए तैयार है। भारत के पास 360 डिग्री पर घूमने वाले रोटोडोम लगे तीन फाल्कन और डीआरडीओ निर्मित दो अवाक्स हैं। वहीं, चीन के पास 28 और पाकिस्तान के पास सात हैं, जो विपरीत परिस्थितियों में हवाई हमले को कमांड देने के काम करता है। सरकार पूरी प्रक्रिया को लेकर तैयार है। अधिग्रहण का मसौदा पिछले सप्ताह सुरक्षा मामले के कैबिनेट कमेटी के समक्ष रखा गया। यह दूसरी बार है जब यह सीसीएस तक पहुंचा है। पिछली बार, सीसीएस ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को प्रस्ताव वापस भेजा और कुछ स्पष्टीकरण मांगे थे।

फाल्कन रडार की कीमत तकरीबन 100 करोड़ डॉलर है। वहीं, इसके प्लेटफार्म की भी कीमत 100 करोड़ डॉलर है। रडार और प्लेटफॉर्म को इज़राइल में तैयार किया जाएगा। फुल सिस्टम के भारत आने में तकरीबन दो से तीन साल लगेंगे। भारतीय वायु सेना द्वारा 26 फरवरी के बालाकोट हमले के बाद पाकिस्तानी हवाई हमले के दौरान सबसे पहले इसकी की आवश्यकता महसूस की गई। जब पाकिस्तान अपने वायु क्षेत्र में किसी भी घुसपैठ का पता लगाने और उसे हटाने के लिए दो स्वीडिश निर्मित अवाक्स के साथ चक्कर लगा रहा था, उस समय भारतीय वायुसेना अपने संसाधनों की कमी के कारण कइ र् बार असु रक्षित महसू सकर रही थी। साथ ही पूर्वी लद्दाख में चीन की एकतरफा आक्रामकता और दोनों पक्षों में विशेष प्रतिनिधियों के सहमत होने के बाद भी स्थिति में सुधार लाने के लिए अनिच्छा के कारण आकाश में इसकी अधिक आवश्यकता महसूस की गई। 

इसके अलावा मोदी सरकार ने सीमा सड़क संगठन के साथ दौलत बेग ओल्डी सेक्टर की ओर सड़क संपर्क को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। गृह मंत्रालय ने दुर्ग के रूप में मुरबो के माध्यम से डीबीओ को जोड़ने के लिए दरबुक-श्योक-डीबीओ सड़क काटने की अनुमति देने के लिए कहा है। बीआरओ ने पहले से ही मुर्गो से ससेर ब्रानगसा तक सड़क का निर्माण किया है, जो सेसर ला के मुहाने पर स्थित है। भविष्य में एक बार सड़क बन जाने के बाद, यह भारतीय सेना को आवश्यकता के आधार पर तेजी से सियाचिन सेक्टर से उप-सेक्टर उत्तर में सैनिकों को स्थानांतरित करने में मदद मिलेगी। भारतीय सेना उच्च मूल्य अवास के अलावा, अपने बटालियन कमांडरों के लिए 200 सामरिक ड्रोन भी प्राप्त कर रही है ताकि तत्काल युद्ध थियेटर पारदर्शी हो। इस ड्रोन को डीआरडीओ के सहयोग से स्थानीय रूप से विकसित किया गया है।

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